
पटना : बिहार की सियासी गहमागहमी के बीच राज्यसभा सांसद और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की है। दोनों की मुलाकात गुपचुप तरीके से हुई है, जिसकी भनक किसी को नहीं थी। सोमवार की देर शाम बंद कमरे में करीब डेढ घंटे तक दोनों नेताओं की मुलाकात हुई है। अब इस मुलाकात के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
बता दें कि जनसुराज यात्रा पर निकले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने हाल ही में एक बयान दिया था कि नीतीश कुमार ने जदयू सांसद और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह के जरिए भाजपा के साथ बातचीत की एक लाइन खुली रखी है। ऐसे में नीतीश और हरिवंश की मुलाकात के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है कि क्या प्रशांत किशोर की भविष्यवाणी सही साबित होगी?
मुलाकात को लेकर क्यों बढ़ी हलचल?
बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव लैंड फॉर जॉब मामले में चार्जशीटेड हुए हैं जिसके बाद अब इस मुलाकात को लेकर हलचल बढ़ी है। राउज एवेन्यू कोर्ट में 12 जुलाई को इस मामले में सुनवाई होनी है। आरोप पत्र में बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव का नाम आरोपी के तौर पर शामिल हैं। इसी मामले में सीबीआई पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और कई अन्य के खिलाफ पहले ही आरोप पत्र दायर कर चुकी है। ऐसे में सोमवार को ही नीतीश और हरिवंश की हुई मुलाकात को अलग नजरिए से देखा जा रहा है।
सवाल उठ रहा है कि नीतीश कुमार और हरिवंश की मुलाकात सिर्फ औपचारिकता है या कुछ और है? बता दें कि अभी कुछ दिन पहले ही सीएम नीतीश कुमार ने अपने विधायकों, विधान पार्षदों और सांसदों से वन-टू-वन मुलाकात की थी। ऐसे में हो सकता है यह मुलाकात भी इसी कड़ी का हिस्सा हो, लेकिन बिहार की राजनीति में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा।
बिहार की राजनीति को जानने वालों का कहना है कि यह मुलाकात जितनी सरल दिख रही है, उतनी है नहीं। कहां तो एक समय हरिवंश को पार्टी अध्यक्ष ललन सिंह और पार्टी प्रवक्ता नीरज कुमार ने पत्रकारिता को शर्मसार करने का आरोप लगाया था। तब माना जा रहा था कि आज नहीं तो कल हरिवंश पर पार्टी की ओर से गाज गिराई जाएगी और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। लेकिन अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उनसे मुलाकात हो रही है। और इस मुलाकात की टाइमिंग भी बहुत महत्वपूर्ण है।
दरअसल, नीतीश कुमार और उनकी पार्टी ने नए संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर विरोध करने का निर्णय लिया था। नीतीश कुमार की पार्टी के अलावा करीब 20 दलों ने उद्घाटन समारोह का बहिष्कार भी किया था, लेकिन राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश समारोह में मौजूद थे। इसके बाद जेडीयू ने आधिकारिक रूप से हरिवंश के शामिल होने पर गहरी नाराजगी जताई थी। उसके बाद सीएम नीतीश कुमार और हरिवंश की यह पहली मुलाकात है। बताया जा रहा है कि नए संसद भवन के उद्घाटन के बाद नीतीश कुमार और हरिवंश के बीच संवादहीनता की स्थिति पैदा हो गई थी।
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