
Bharat varta desk:
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि देवी, देवता ही मंदिर से जुड़ी संपत्ति के मालिक हैं ,पुजारी नहीं। जस्टिस हेमंत गुप्ता और एएस बोपन्ना की की खंडपीठ ने कहाकि पुजारी केवल मंदिर की संपत्ति के प्रबंधन के उद्देश्य से जमीन का काम कर सकते हैं लेकिन जमीन के मालिक देवता ही रहेंगे। इस संबंध में कोर्ट ने अयोध्या मंदिर ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए मध्य प्रदेश के एक मंदिर के मामले में यह फैसला सुनाया।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि मंदिर की ”स्वामित्व स्तंभ में केवल देवता का नाम लिखा जाए। भू राजस्व के दस्तावेजों से पुजारियों के नाम हटाए जाएं क्योंकि वे केवल व्यवस्था के लिए होते हैं। खंडपीठ ने कहा कि मंदिर की जमीन का पुजारी काश्तकार नहीं, सिर्फ रक्षक है। वह मकान के किराएदार जैसा है। कोर्ट ने कहा कि मंदिर में जो भी पुजारी होगा, वही वहाँ देवी देवताओं को भोग लगाएगा।
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