Bharat varta desk:
दिल्ली विश्वविद्यालय ने बीए (ऑनर्स) अंग्रेजी पाठ्यक्रम से महाश्वेता देवी की लघुकथा ‘द्रौपदी’ को हटा दिया है। इसके साथ तमिल लेखक बामा और सुकरिथरणी की रचनाओं को भी हटाया गया है।
महाश्वेता देवी की इस लघु कथा को लेकर कई सवाल उठे थे। इसके बाद विश्वविद्यालय के एकेडमिक काउंसिल ने इस पर संज्ञान लेते हुए इसे हटाने का फैसला लिया। अब ‘द्रौपदी’ के स्थान पर एक छोटी कहानी ‘ह्यसुल्तानाज ड्रीम्स’ को सिलेबस में शामिल किया गया है।
बता दें कि ‘द्रौपदी’, महाश्वेता देवी द्वारा बंगला में रचित एक लघु कथा है इसका अंग्रेजी अनुवाद गायत्री स्पिवक द्वारा किया गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में सालों से इसे पढ़ाया जा रहा था। कहने को यह एक आदिवासी महिला के अपमान की कहानी है। इसमें महिला के प्राइवेट बॉडी पार्ट, यौन दुराचार एवं यौन हमलों का अश्लील वर्णन किया गया है। मगर इसमें महाभारत के प्रतिष्ठित पात्र द्रोपदी का जिक्र करके हिंदू धर्म को अपमान और नीचा दिखाने का प्रयास किया गया है। इस पर शिक्षकों के एक वर्ग द्वारा आपत्ति जताई गई है। इसीलिए विश्वविद्यालय ने इसे पाठ्यक्रम से हटा दिया है।
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