
आर्मेनिया के खिलाफ मिसाइल हमला शुरू अजरबैजान के पक्ष में है तुर्की
नईदिल्ली : तुर्की वैश्विक मंच पर अपना सिक्का जमाना चाहता है, अपना असर क्यों बढ़ाना चाहता है। तुर्की नाटो का सदस्य होने के बावजूद फ़्रांस और ग्रीस जैसे नेटो के दूसरे सदस्यों के साथ क्यों तनावपूर्ण रिश्ते बनाए हुए है और फिर आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच जारी युद्ध में तुर्की अज़रबैजान का साथ क्यों दे रहा है?
उधर सोमवार को नेटो के महासचिव येन स्टोलटेनबर्ग तुर्की और ग्रीस के दो दिनों के दौरे पर अंकारा पहुँचे और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन से मुलाक़ात की, जिसके बाद महासचिव ने नेटो के कई अंतर्राष्ट्रीय मिशन में तुर्की के योगदान की प्रशंसा की.
उनके दौरे का मक़सद तुर्की से नेटो के बिगड़ते रिश्ते में सुधार लाना था.
महासचिव के दौरे से पहले नेटो के दो सदस्य तुर्की और ग्रीस के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए एक हॉटलाइन स्थापित करने में नेटो ने मदद की.
तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत तेवुसोग्लू ने 6 अक्तूबर की अपनी अज़रबैजान यात्रा के दौरान राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाक़ात की और विवादित नागोर्नो-काराबाख़ क्षेत्र को लेकर आर्मीनिया के ख़िलाफ़ जारी युद्ध में अज़रबैजान का साथ देने की घोषणा की.
उन्हों ने कहा, ‘अज़रबैजान ने घोषणा की है कि वो आर्मीनिया के उकसावों का जवाब नहीं देगा और ये कि वो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर अंतर्राष्ट्रीय क़ानून का पालन करते हुए अपने बचाव के लिए अपने अधिकार का इस्तेमाल करेगा. हम इसका समर्थन करते हैं.’
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