
रांची, भारत वार्ता संवाददाता:
सुप्रीम कोर्ट ने झारखण्ड के डीजीपी पद पर नीरज सिन्हा की नियुक्ति के मामले में नाराजगी जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना की पीठ ने इस मामले में नीरज सिन्हा को प्रतिवादी बनाते हुए नोटिस जारी किया है। वह 2 सप्ताह बाद फिर इस मामले की सुनवाई करेगा।
झारखण्ड के डीजीपी की नियुक्ति को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि झारखण्ड सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया है। राज्य सरकार ने पहले एमवी राव को राज्य का प्रभारी डीजीपी बनाया और फिर उन्हें हटाकर नीरज सिन्हा को डीजीपी बना दिया। सरकार के इस फैसले के खिलाफ जब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई और कोर्ट ने सरकार को नोटिस की तो सरकार ने डीजीपी पद पर सिन्हा की स्थाई नियुक्ति कर दी। यह कोर्ट की अवमानना का मामला है।
इस पर चीफ जस्टिस ने कोर्ट में मौजूद झारखंड सरकार के वकील कपिल सिब्बल से कहा कि जब कोर्ट ने नोटिस जारी किया था तो सरकार ने डीजुपी की इस तरह से नियुक्ति क्यों की? चीफ जस्टिस ने मौखिक रूप से कहा कि इन परिस्थितियों को देखकर लगता है कि राज्य सरकार और यूपीएससी के खिलाफ कड़े निर्णय पारित करने की आवश्यकता है।
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