
Bharat varta desk:
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें सरकार ने यूपीएससी की अनुमति के बगैर डीजीपी की नियुक्ति का अधिकार मांगा था।
सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार की आलोचना करते हुए यह कहा कि हमारे पिछले आदेश में बदलाव की कोई दरकार नहीं है। इस प्रकार का आवेदन कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि हमारे पिछले आदेश में बदलाव की कोई जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार के आवेदन कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह की याचिका पर फैसला देते हुए 2006 म्में कहा था कि किसी भी राज्य में डीजीपी के पद पर नियुक्ति से पहले राज्य सरकार को यूपीएससी से वरिष्ठ औऱ योग्य आईपीएस अधिकारियों की लिस्ट लेनी पड़ेगी। उन तीन नामों में से नए डीजीपी का चयन करना होगा।
ममता सरकार ने याचिका में कहा था कि यूपीएससी ने पद के लिए सुझाए गए नामों की बंगाल सरकार की सूची में कई खामियां निकाल दी हैं। यह भारतीय संघीय शासन प्रणाली के अनुरूप नहीं है। बंगाल में 31 अगस्त को डीजीपी के रिटायर होने के बाद पद खाली है। सरकार ने कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति की है। याचिका में सरकार ने मांग की थी कि राज्य सरकार को डीजीपी के चयन का पूरा अधिकार मिलना चाहिए। सरकार का कहना है कि यूपीएससी के पास डीजीपी चयन के लिए कोई विशेषज्ञता नहीं है।
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