
नई दिल्ली संवाददाता : जम्मू-कश्मीर में रोशनी एक्ट की आड़ लेकर बड़े राजनेताओं ने जम्मू-कश्मीर को 25 हजार करोड़ रुपये की चपत लगा दी। इनमें नेता ही नहीं, बल्कि वहां के अनेक नौकरशाह भी शामिल हैं। सुरक्षा एवं राजनीतिक विश्लेषक ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) कहते हैं कि ये मामला तो अभी शुरू हुआ है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस बात को अच्छे से जानते हैं कि ‘रोशनी’ एक्ट के जरिए करोड़ों रुपये की जमीन इधर उधर करने वाले नेता सीबीआई जांच से बच नहीं सकेंगे।
सीबीआई ने एक दिन पहले ही तीन अलग-अलग केस दर्ज किए हैं। गुप्ता के मुताबिक, महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला और कांग्रेस पार्टी को आखिर ‘गुपकार’ समझौता करने के लिए क्यों साथ आना पड़ा। दरअसल, ये लोग खुद को रोशनी एक्ट के घोटाले से बचाने के लिए ‘गुपकार’ बैठकें कर रहे हैं। इनका मकसद है कि देश-दुनिया का ध्यान ‘रोशनी’ जैसे बड़े घोटाले से हट कर गुपकार पर आ जाए।
ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) बताते हैं कई जगह की जमीन तो अब दूसरे व तीसरे व्यक्ति को बेची जा चुकी है। पावर अटॉर्नी का जबरदस्त खेल चला है। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जम्मू और सांबा जिलों में जमीन हड़पने के मामलों की जांच शुरू कर दी है। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ही इन नेताओं के चेहरे उतरे हुए थे। अब रही सही कसर ‘रोशनी’ एक्ट की जांच ने पूरी कर दी। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, नेशनल कांफ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला और कांग्रेस पार्टी के नेता जानते हैं कि जमीन घोटाले की आंच देर-सवेर उन तक पहुंचेगी। लोगों को जब यह मालूम होगा कि जमीन घोटाले में ये नेता शामिल हैं तो इनके पास मुंह छिपाने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं रहेगा।
जिन लोगों ने रोशनी एक्ट की आड़ लेकर करोड़ों रुपये की जमीनों पर कब्जे कराए हैं, वही लोग अब ‘गुपकार’ समझौते के जरिए देश दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचना चाह रहे हैं। हालांकि वे इसमें कामयाब नहीं होंगे, क्योंकि सीबीआई जब अपनी चार्जशीट दाखिल करेगी तो उस वक्त इन नेताओं के पास कोई जवाब नहीं होगा।
जम्मू-कश्मीर के प्रमुख सचिव ‘राजस्व विभाग’ पहले ही कह चुके हैं कि एक जनवरी 2001 के आधार पर सरकारी जमीन का ब्योरा एकत्र कर उसे वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगे। कौन सी जमीन पर किसका कब्जा है, इस बाबत सभी अवैध कब्जाधारकों के नाम सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
अब नेताओं और उनके रिश्तेदारों के अलावा उन नौकरशाहों को भी पसीना आ रहा है, जिन्होंने जमीन पर कब्जा कराने में मदद की थी। सांबा जिले में राजस्व अधिकारियों ने रोशनी एक्ट के प्रावधानों का जान-बूझकर उल्लंघन कर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कराया है।
अनिल गुप्ता बताते हैं, यही वो गुपकार गैंग है, जिन्होंने अपने शासनकाल के दौरान जम्मू की डोगरा संस्कृति को खत्म करने का भरसक प्रयास किया है। साठ साल के शासन में इन लोगों ने सिलसिलेवार तरीके से गौरवशाली संस्कृति पर प्रहार किए हैं। कांग्रेस पार्टी भी इसके लिए बराबर की जिम्मेदार है। यही वजह है कि अब जम्मू-कश्मीर में उसका अपना कोई वजूद नहीं रहा। रोशनी एक्ट की जांच रिपोर्ट जब दुनिया के सामने आएगी तो उस वक्त हो सकता है कि उनके नेता, जिनका केंद्र में बड़ा नाम रहा है, वे घर से बाहर ही न निकलें।
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