देश दुनिया

कूटनीतिक और राजनीतिक मंच पर घिर गया चीन भारत से

एशियाई देशों में भी विरोध हो रहा चीन की नीतियों का

NEWSNLIVE DESK:  भारत को उकसाने की चीन को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार जून में पीएलए द्वारा लद्दाख की गैलवान घाटी में भारतीय सैनिकों की हत्या के बाद चीन की वैश्विक मंच पर बहुत किरकिरी हुई और यह अलग-थलग पड़ता नजर आ रहा है। इसके अलावा कोरोना को लेकर भी चीन अपनी विश्वसनीयता खो चुका है। अपनी आक्रामक नीतियों के चलते ही चीन का क्वाड देशों के अलावा एशियाई देशों में भी विरोध शुरू हो चुका है।

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने हाल ही में कहा था कि आक्रामकता और विस्तारवाद चीनी राष्ट्र के “जीन” में कभी नहीं रहा है।

चारों तरफ से घिर गया चीन
अप्रैल और मई में उन्होंने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को भारत के लद्दाख क्षेत्र के बर्फीले सीमावर्ती इलाकों में उग्र घुसपैठ शुरू करने का निर्देश दिया । जैसा कि शी ने शायद सोचा था यह इस योजना को अंजान देने सही समय नहीं निकला और चीन चारों तरफ से घिर गया । चीन को विस्तारवाद से दूर करने के लिए इंडो-पैसिफिक शक्तियों ने इसका विरोध तेज कर दिया है और इसमें चीन का सबसे शक्तिशाली प्रतियोगी अमेरिका शामिल है जिससे उसका द्विपक्षीय रणनीतिक टकराव बढ़ रहा है। इस टकराव में तकनीकी, आर्थिक, राजनयिक और सैन्य आयाम शामिल हैं। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़े चीन को अब इसका असर भी साफ दिखने लगा है । आश्चर्य की बात नहीं है कि चीन PLA के अवतरण के लिए प्रतिबद्ध है, जिसे वह रक्षात्मक कवच के रूप में दिखाता है। यही वजह हैकि पिछले महीने के अंत में, शी ने वरिष्ठ अधिकारियों की हिमालयी क्षेत्र में घुसपैठ को “सीमा सुरक्षा को मजबूत करना” और “सीमा सुरक्षा सुनिश्चित करना” बताया था।

भारत के साथ वार्ता का कोई नतीजा नहीं
पूर्वी लद्दाख के चूशुल में हुई सातवें दौर की बातचीत में भारत ने एक बार फिर पूर्वी लद्दाख क्षेत्र से चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को पूरी तरह हटाने की अपनी मांग दोहराई लेकिन बातचीत का नतीजा भी कुछ नहीं निकला। अप्रैल-मई के बाद से ही भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव बना हुआ है। अमरीका का दावा है कि अब चीन ने सीमा के निकट स्थायी स्ट्रक्चर बनाना शुरू कर दिया है जबकि चीन ये आरोप लगाता है कि सीमावर्ती इलाक़ों में भारत निर्माण कार्य कर रहा है। इसका मतलब ये हुआ कि अब एलएसी भी भारत-पाकिस्तान के बीच एलओसी की तरह हो सकता है, जहाँ दोनों तरफ़ स्थायी सैन्य पोस्ट हैं और जहाँ आए दिन झड़पें होती रहती हैं।

डॉ सुरेंद्र

Recent Posts

बिहार को जल्द मिलेगा नया सीएम, विधायक दल का नेता चुनने के लिए शिवराज केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त

Bharat varta Desk बिहार को इस हफ्ते नया सीएम मिल जाएगा. नीतीश कुमार के इस्तीफे… Read More

1 day ago

आशा भोसले नहीं रहीं

Bharat varta Desk प्रख्यात गायिका आशा भोसले नहीं रहीं । 92 साल की उम्र में… Read More

1 day ago

प्रो. सरोज शर्मा रांची विश्वविद्यालय की कुलपति नियुक्त

Bharat varta Desk 10 अप्रैल 2026 को झारखंड के राज्यपाल-सह-कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने दिल्ली के… Read More

3 days ago

सरोज शर्मा रांची विश्वविद्यालय की नई कुलपति नियुक्त

Bharat varta Desk 10 अप्रैल 2026 को झारखंड के राज्यपाल-सह-कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने दिल्ली के… Read More

3 days ago

नीतीश कुमार ने राज्यसभा की सदस्यता ली

Bharat varta Desk बिहार की सियासत के लिए आज का दिन एक बड़े और ऐतिहासिक… Read More

3 days ago