शख्सियत

अपने जीते जी बच्चों को नहीं दे संपत्ति, उद्योगपति विजय सिंघानिया ने बांटा अपना दर्द


Bharat varta desk:

रेमंड समूह के पूर्व ‘चेयरमैन एमेरिटस’और देश के जाने माने उद्योगपति विजयपत सिंघानिया का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में जो सबसे बड़े सबक सीखे उनमें से एक यह है कि किसी को जीवित रहते अपनी संपत्ति अपने बच्चों को देने में सावधानी बरतनी चाहिए।
अपनी आत्मकथा “ऐन इन्कम्प्लीट लाइफ” में अपने बचपन से लेकर रेमंड में बिताये कई दशकों और उसके बाद के जीवन का वृत्तांत लिखा है। इसमें उन्होंने अपने दर्द को साझा किया है। परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति को लेकर हुए विवाद में फरवरी 2015 में सिंघानिया को अपना काम और पैतृक घर छोड़ना पड़ा था। उन्होंने जो खोया था उसे पाने के लिए वह आज भी संघर्ष कर रहे हैं।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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