
नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित कर रहे हैं। भारत को इस तथ्य पर गर्व है कि यह संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्यों में से एक है। इस ऐतिहासिक अवसर पर, मैं भारत के 1.3 बिलियन लोगों की भावनाओं को साझा करने के लिए इस वैश्विक मंच पर आया हूं। संयुक्त राष्ट्र महासभा की 75वीं वर्षगांठ पर बोले पीएम मोदी कि आज हमारे सामने नई चुनौतियां हैं। पीएम मोदी ने कहा कि अगर हम पिछले 75 वर्षों में संयुक्त राष्ट्र के प्रदर्शन का एक उद्देश्यपूर्ण आश्वासन देना चाहते हैं, तो हम कई शानदार उपलब्धियों को देखते हैं। लेकिन, साथ ही, ऐसे कई उदाहरण भी हैं जो संयुक्त राष्ट्र के काम के गंभीर आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता को इंगित करते हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज पूरे विश्व समुदाय के सामने एक बहुत बड़ा सवाल है कि जिस संस्था का गठन तब की परिस्थितियों में हुआ था, उसका स्वरूप क्या आज भी प्रासंगिक है? प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी पर जोर दिया. पीएम मोदी ने सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका को लेकर संयुक्त राष्ट्र की ईकाई से पूछा कि संयुक्त राष्ट्र की फैसला लेने वाली इकाई से भारत को आखिर कब तक दूर रखा जाएगा. पीएम मोदी ने वैश्विक संस्था से पूछा ‘हमें कब तक इंतजार करना होगा? भारत को संयुक्त राष्ट्र की निर्णय प्रक्रिया से दूर कब रखा जाएगा? ‘इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर हम बीते 75 वर्षों में संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियों का मूल्यांकन करें, तो अनेक उपलब्धियां दिखाई देती हैं। अनेक ऐसे उदाहरण भी हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के सामने गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता खड़ी करते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि ये बात सही है कि कहने को तो तीसरा विश्व युद्ध नहीं हुआ, लेकिन इस बात को नकार नहीं सकते कि अनेकों युद्ध हुए, अनेकों गृहयुद्ध भी हुए। कितने ही आतंकी हमलों ने खून की नदियां बहती रहीं। इन युद्धों में, इन हमलों में, जो मारे गए, वो हमारी-आपकी तरह इंसान ही थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 8-9 महीने से पूरा विश्व कोरोना वैश्विक महामारी से संघर्ष कर रहा है। इस वैश्विक महामारी से निपटने के प्रयासों में संयुक्त राष्ट्र कहां है? एक प्रभावशाली रेस्पॉन्स कहां है? पीएम मोदी ने कहा कि विश्व के सब से बड़े लोकतंत्र होने की प्रतिष्ठा और इसके अनुभव को हम विश्व हित के लिए उपयोग करेंगे। हमारा मार्ग जनकल्याण से जगकल्याण का है। भारत की आवाज़ हमेशा शांति, सुरक्षा, और समृद्धि के लिए उठेगी।प्रधानमंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रियाओं में बदलाव, व्यवस्थाओं में बदलाव, स्वरूप में बदलाव, आज समय की मांग है। भारत की आवाज़ मानवता, मानव जाति और मानवीय मूल्यों के दुश्मन- आतंकवाद, अवैध हथियारों की तस्करी, ड्रग्स, मनी लॉन्डरिंग के खिलाफ उठेगी।
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