सधी शुरुआत से बनेगी बात, रेल अधिकारी दिलीप कुमार का कॉलम ‘अप्प दीपो भव’

अप्प दीपो भव-28

-दिलीप कुमार (कवि, लेखक, मोटिवेशनल स्पीकर और भारतीय रेल यातायात सेवा के वरिष्ठ अधिकारी)

कार्य छोटा हो या बड़ा, कार्य को संपादित करने की प्रक्रिया जटिल होती है। पूरी प्रक्रिया को समझ कर, कार्य को विभिन्न चरणों में बैठकर सधी शुरुआत करने वाले लोगों के कामयाब होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। ग्रीक विचारक अरस्तु ने कहा है-
एक अच्छी शुरुआत आधा काम हो जाने के बराबर है।
इस संबंध में मगध क्षेत्र में एक कहावत बहुत ही प्रसिद्ध है-
अच्छे से नाधा, काम हुआ आधा
किसी भी काम की शुरुआत यदि अच्छे तरीके से की जाए तो आधा काम शुरुआत के साथ ही संपन्न हो जाता है। इसलिए काम की सधी शुरुआत जरूरी है।
एक बार जब काम को हाथ में ले लें, तो फिर उसे हल्का समझ कर अनमने ढंग से न करें। हर काम की अपनी अलग महत्ता होती है। कुशल तरीके से काम को संपादित करने के लिए उसे पूरी तरह से समझ कर यथोचित योजना तैयार कर लेना जरूरी होता है। काम को हल्के में लेने और सही ढंग से योजना नहीं बनाने पर काम के दौरान तरह-तरह की बाधाएं आती हैं और सकल लागत में वृद्धि हो जाती है। हड़बड़ी में बिना अच्छी तैयारी के शुरू किए गए काम की पूर्णता में विलंब होने का खतरा भी रहता है।
पूरी दुनिया में सधी हुई शुरुआत की महत्ता को समझा जा रहा है। प्रबंधकों को कहा जा रहा है कि वह काम की शुरुआत में जल्दबाजी न दिखाएं। निर्धारित काम की पूरी योजना बनाएं। जरूरी मार्केट रिसर्च करें । सूचनाओं का संग्रहण और काम से जुड़े विभिन्न स्टेकहोल्डर्स की पहचान काम प्रारंभ करने से पहले कर लें। काम प्रारंभ होने से पहले योजना पर जितना अधिक परिश्रम किया जाएगा, काम करना उतना ही आसान हो जाएगा।
मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में पेट्रोनास टावर है। दुनिया की सबसे ऊंची इमारत के रूप में इसे बनाने की घोषणा के 3 साल के अंदर इस इमारत को बना लिया गया था। आश्चर्यजनक रूप से घोषणा के डेढ़ साल तक जमीन पर कोई भी काम प्रारंभ नहीं हुआ था। इसे बनाने वाली कंपनियों ने आदि से अंत तक पूरे काम का खाका और संसाधनों का विस्तृत विवरण तैयार करने में डेढ़ साल का समय लिया। सुसंगत तरीके से जब पूरी योजना बना ली गई तो उसे जमीन पर उतारने का काम प्रारंभ हुआ। इसका सुखद परिणाम निकला। पेट्रोनास टावर निर्धारित समय अवधि में बनकर मलेशिया के शानो शौकत को बढ़ाने के लिए खड़ा हो गया। इसके निर्माण में जितनी लागत आने की संभावना थी, उसमें भी कमी आई।
सधी शुरुआत का क्रिकेट के मैच में बहुत महत्व होता है। दुनिया की सभी टीमें पारी की शुरुआत के लिए विशेषज्ञ ओपनर बल्लेबाज रखती हैं। ये विशेषज्ञ बल्लेबाज, पिच की स्थिति, मौसम, हवा का गेंदबाजी पर प्रभाव तथा विपक्षी टीम के गेंदबाजों की ताकत का आकलन करते हुए अपनी टीम के लिए ठोस शुरुआत करने का प्रयास करते हैं। क्रिकेट में 60% से अधिक मैच उस टीम द्वारा जीता जाता है जिसकी पारी की शुरुआत ठोस होती है। तैराकी और एथलेटिक्स जैसे खेलों में तो सधी हुई शुरुआत का महत्व और भी ज्यादा होता है। खेल के शुरुआत में सेकंड के सौवें हिस्से की देरी करने वाले खिलाड़ी सोने का तमगा पाते-पाते रह जाते हैं। कम दूरी की रेस और तैराकी की विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं के फाइनल में भाग लेने वाले अधिकतर खिलाड़ियों का स्टैमिना लगभग बराबर ही होता है। लेकिन, जो खिलाड़ी सधी शुरुआत करते हैं, वही चैंपियन बनते हैं।

कैरियर निर्माण में भी ठोस शुरुआत का बहुत महत्व होता है। जो लोग स्कूली शिक्षा के महत्व को समझते हुए संपूर्ण व्यक्तित्व विकास के लिए बचपन से ही प्रयास करते रहते हैं, उनकी कामयाबी की संभावना अपेक्षाकृत अधिक रहती है। कम उम्र में सीखना आसान होता है। इसी तरह जब हम कोई नया काम करते हैं तो उत्साह बहुत ज्यादा रहता है। ज्यादा उत्साह से ज्यादा काम संपादित होता है। काम में जितना विलम्ब होता जाता है, उत्साह उतना ही कम होता चला जाता है। इसीलिए समझदार लोग ज्यादा से ज्यादा काम शुरुआत में ही कर लेने का प्रयास करते हैं।
जीवन को सुंदर और सुकूनभरा बनाए रखने के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा काम सवेरे-सवेरे ही कर लेना चाहिए। उगते सूरज के साथ जैसी ताजगी और ऊर्जा हम महसूस करते हैं, वैसे ताजगी और ऊर्जा शाम को या देर रात मैं हमारे पास नहीं होती। अध्ययन-अध्यापन, चिंतन-मनन, योग-प्राणायाम जैसे कार्यों के लिए भी दिन की शुरुआत का समय सबसे उपयुक्त होता है।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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