
अप्प दीपो भव-6
– दिलीप कुमार (लेखक, कवि और मोटिवेशनल स्पीकर होने के साथ-साथ रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी)
सुंदर जीवन के लिए मन और मस्तिष्क का स्वस्थ होना जरूरी है। स्वस्थ मन और स्वस्थ मस्तिष्क के लिए तन की तंदुरुस्ती भी बहुत ही जरूरी है। वस्तुतः तन ही वह मंदिर है जहां स्वस्थ मन और स्वस्थ मस्तिष्क देवता के रूप में विद्यमान रहते हैं। अपने जीवन को सुंदर बनाए रखने के लिए तन रूपी मंदिर को सुंदर और स्वस्थ रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
विचारों की शुद्धता से मस्तिष्क सुंदर होता है जबकि भावों की शुद्धता और अच्छे कर्मों से मन सुंदर बनता है। तन को सुंदर बनाने के लिए सही खानपान के साथ-साथ ध्यान, योग और प्राणायाम की आवश्यकता होती है। अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी आदि योगिक क्रियाओं के माध्यम से हम अपने शरीर को स्वस्थ और मजबूत बना सकते हैं।
सनातन ज्ञान परंपरा में माना गया है कि भौतिक शरीर के अंदर उर्जा है जो मनुष्य को जीवित रखती है। इस ऊर्जा को प्राण ऊर्जा भी कहते हैं। यदि प्राण ऊर्जा समाप्त हो जाए तो व्यक्ति का जीवन समाप्त हो जाता है। हमारा मस्तिष्क हमारे भौतिक शरीर का स्वामी होता है। बुद्धि की सहायता से शरीर की ऊर्जा को नियंत्रण रखने की विधि को आत्मज्ञान कहते हैं। परमात्मा को प्रसन्न करना है तो आत्मा को प्रसन्न रखना आवश्यक है और यदि आत्मा को प्रसन्न रखना है तो फिर आत्मा के मंदिर यानी शरीर को प्रसन्न रखना आवश्यक है। ज्ञानशील व्यक्ति अपने विवेक का इस्तेमाल कर ऐसे कार्यों को करने से बचते हैं जिससे आत्मा को किसी प्रकार का कष्ट हो। अज्ञानी व्यक्ति अज्ञानतावश और कई बार जानबूझकर भी ऐसे कार्य करते रहते हैं जिनसे दूसरों की आत्मा को कष्ट पहुंचे। दुर्भाग्यवश दूसरों की आत्मा को कष्ट पहुंचाने के प्रयास में ऐसे अज्ञानी व्यक्ति अपनी आत्मा को भी कष्ट पहुंचाते रहते हैं।
शरीर, मस्तिष्क और मन के बीच बेहतर समन्वय के लिए चक्रीय संतुलन आवश्यक है। मानव शरीर में 144 चक्रों की मौजूदगी मानी गई है जिसमें सात चक्र प्रमुख हैं। ये चक्र हैं- मूलाधार चक्र
स्वाधिष्ठान चक्र
मणिपुर चक्र
अनाहत चक्र
विशुद्ध चक्र
आज्ञा चक्र और
मुकुट चक्र।
ऐसा माना जाता है कि मानव शरीर के हर चक्र में प्राण ऊर्जा की आवृत्ति अलग-अलग होती है। इन आवृत्तियों को संतुलित करना चक्र संतुलन कहलाता है। चक्र संतुलन के लिए गहरी सांस लेने, उसे 15 से 20 सेकंड तक थामने और फिर एक साथ छोड़ने की प्रक्रिया को अपनाना बेहतर माना जाता है। इस प्रक्रिया में जब हम श्वांस को थाम कर रखते हैं तो कार्बन जमा होने लगता है और जब श्वांस छोड़ते हैं तो नकारात्मक ऊर्जा कार्बन के साथ-साथ शरीर से बाहर आ जाती है।
कहने का सार यह है कि हमें अपने शरीर को सेहतमंद और स्वस्थ बनाने के लिए प्रतिदिन सुबह थोड़ा सा समय निकाल कर योग तथा प्राणायाम करना चाहिए।
Bharat varta Desk जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के लिए… Read More
Bharat varta Desk दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल फ्लॉरिस स्टे के एक रेस्टोरेंट में… Read More
Bharat varta Desk सुश्री गीतिका पांडेय (IRAS अधिकारी) को पूर्व रेलवे (Eastern Railway), कोलकाता का… Read More
Bharat varta Desk ममता पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमला… Read More
Bharat varta Desk बिहार सरकार ने चर्चित रिशु श्री मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर हेराफेरी मामले… Read More
Bharat varta Desk सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी (NEET-UG) में हुई गड़बड़ी को लेकर एनटीए (NTA)… Read More