
पटना, भारत वार्ता संवाददाता: पटना विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्राध्यापक प्रोफेसर प्रशांत दत्ता नहीं रहे। उन्होंने आज अंतिम सांस ली। इतिहास के नामचीन प्रोफेसर डॉक्टर दत्ता पटना विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष भी रहे। वे प्रख्यात इतिहासकार प्रोफेसर केके दत्त के बेटे थे। प्रोफेसर केके दत्त भी पटना विश्वविद्यालय इतिहास विभाग के अध्यक्ष रहे। उन्होंने आधुनिक इतिहास और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर कई ऐसी किताबें लिखीं जो इतिहास की अमूल्य निधि मानी जाती हैं। प्रोफेसर के के दत्त झारखंड के पाकुड़ जिले के बिरकिट्टी के रहने वाले थे। उन्होंने सिदो कान्हू के संथाल विद्रोह पर भी प्रमाणिक पुस्तक लिखी। प्रोफेसर प्रशांत दत्त के निधन पर बुद्धिजीवियों ने शोक प्रकट किया है। जनता दल यू के सवर्ण प्रकोष्ठ के अध्यक्ष और पटना विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य डॉ नितीश टनटन ने कहा है कि प्रशांत दत्ता के निधन से बिहार के बौद्धिक जगत को काफी क्षति हुई है।
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