माटी के रंग कार्यक्रम में दिखे लोक संस्कृति एवं भाषा के विभिन्न रंग

सामयिक परिवेश और सनातन जगृति मंच ने किया दिल्ली में आयोजन

नई दिल्ली : सामाजिक साहित्यिक संस्था सामयिक परिवेश तथा सनातन जागृति मंच द्वारा नई दिल्ली के डॉक्टर अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के समरसता हॉल में माटी के रंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें भारतीय संस्कृति के अलग-अलग रूपों को दिखाया गया। कार्यक्रम की उद्घाटनकर्ता किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की संयुक्त सचिव डॉ. एन. विजय लक्ष्मी ने माटी के रंग कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि हम सब की जड़ें मिट्टी से जुड़ी हैं। माटी के रंग के माध्यम से सामयिक परिवेश लोक संस्कृति, साहित्य के जल से मानवीय पौधों में भावनात्मक ऊर्जा भरने का काम कर रही है। अध्यक्ष ममता मेहरोत्रा ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है, हमें विज्ञान के साथ-साथ ज्ञान से भी जुड़ना होगा। ज्ञान हमारे लोक संस्कृति में ही है। माटी के रंग का उद्देश्य जड़ों से जुड़ना है। भारतीय संग्रहालय संघ के अध्यक्ष प्रो. आनंद बर्द्धन ने लोक भाषा संस्कृति की महत्ता को बहुत सूक्ष्मता के साथ बताया। कहा कि लोक ही हमारी पहचान है। इससे दूरी मतलब अपने अस्तित्व के प्रति उदासीनता है। सनातन जगृति मंच के मुख्य संरक्षक श्री प्रकाश बैताला जैन जी ने कहा कि माटी के रंग को देश के हर कोने में पहुंचना ही सनातन जगृति मंच का उद्देश्य है। आयोजक शशि शेखर शर्मा ने आगत अतिथीयों का अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया। सामयिक परिवेश के संपादक व युवा कवि संजीव मुकेश ने विषय प्रवेश के दौरान कहा कि माटी के रंग का मतलब, गांव की खुशबू, लोक भाषा की मिठास, संस्कृति की सुगंध, संस्कार का गैठी, तीज-त्योहार परंपराओं की डोर, उत्सव, उल्लास, उमंग, आप सबों का साथ, आप सब के संग…. यही तो है माटी का रंग। अतिथियों का स्वागत सामयिक परिवेश के संस्थापक सदस्य राकेश रंजन ने किया और माटी के रंग की परिकल्पना को विस्तार से बताया। अक्षर संसार फाउंडेशन के अध्यक्ष कुंदन कुमार ने कहा अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।

आयोजित कवि सम्मेलन में डॉ. प्रतीक गुप्ता, विभोर चौधरी, संजीव मुकेश, सुधा पांडे, डॉ. नीलम प्रभा और प्रशांत बजरंगी ने अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों को गुदगुदाया तो सामाजिक विसंगतियों पर व्यंग्य के तीर भी चलाएं। कार्यक्रम के दौरान चर्चित लेखिका और सामयिक परिवेश की राष्ट्रीय अध्यक्ष ममता मेहरोत्रा की कहानी बुनकर की बेटी का नाट्य मंचन किया गया। सुमन कुमार के निर्देशन में कला जागरण के कलाकारों ने शानदार अभिनय द्वारा हर पात्र को जीवंत किया। अखिलेश्वर प्रसाद सिन्हा का नाट्य रूपांतरण शानदार रहा। कार्यक्रम में लोकगीतों की खुशबू भी बिखेरी गई। ममता मेहरोत्रा, सत्येंद्र कुमार संगीत, नीतू कुमारी नवगीत और अनिल कुमार ने एक से बढ़कर एक लोक गीतों की प्रस्तुति करके उपस्थित श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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