Categories: शख्सियत

गोविंदाचार्य ने शुरू की नई यात्रा, ‘मिशन तिरहुतपुर’ से ‘ग्रामयुग’ की ओर

Bharat Varta Desk : राजनीति से सन्यास ले चुके चिंतक और विचारक के.एन. गोविंदाचार्य ने एक नई यात्रा की शुरुआत की है। उनकी नई यात्रा ‘मिशन तिरहुत’ इनदिनों चर्चा में है। इससे पूर्व गोविंदाचार्य अपने राजनीतिक सन्यास के 20 वर्ष पूर्व होने पर ‘अध्ययन प्रवास’ यात्रा पर निकले थे। इस दौरान उन्होंने देव प्रयाग से गंगा सागर तक की यात्रा की थी और जगह-जगह लोगों से संवाद भी किया था। बता दें कि गोविंदाचार्य भाजपा के रणनीतिकार रह चुके हैं। वे आरएसएस के विचारक व प्रचारक भी रह चुके हैं।

क्या है ‘मिशन तिरहुतपुर’ ?

‘मिशन तिरहुतपुर’ से जुड़े विमल सिंह से बताते हैं कि मिशन तिरहुतीपुर एक ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था की तलाश है जिसमें भारत सहित पूरी दुनिया समृद्धि और संस्कृति दोनों के साथ सुखपूर्वक जीवनयापन कर सके। आज की व्यवस्था जिसका वर्चस्व पूरी दुनिया पर है, वह अर्थसत्ता की प्रधानता और लाभोन्माद पर टिकी है। आर्थिक शक्तियों का अतिशय केन्द्रीकरण इसका मूल लक्षण है, शेष समस्याएं तो इसके परिणाम मात्र हैं।

विमल सिंह बताते हैं कि एक बात तय है कि मौजूदा व्यवस्था को पारंपरिक और आजकल के प्रचलित तरीकों से चुनौती नहीं दी जा सकती। इनसे चुनौती तो क्या, मौजूदा व्यवस्था को एक छोटी सी खरोंच देना भी संभव नहीं है। इसके लिए तो नए लड़ाके, नए तरीके और नए औजार चाहिए। जहां तक इन नए लड़ाकों, नए तरीकों और नए औजारों की बात है तो सच मानिए कि ये सब हमारे सामने अचानक प्रकट नहीं होंगे। इन्हें तो साहस, पहल और प्रयोग के जरिए ही ढूंढना होगा। छोटी-छोटी असफलताओं की बुनियाद पर ही टिकाऊ सफलता मिल पाएगी।

यह सब कहां और कैसे किया जाए

राजनीति से सन्यास ले चुके चिंतक और विचारक के.एन. गोविन्दाचार्य अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में सतत् अध्ययन, चिंतन और मनन के जरिए इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि नई व्यवस्था के सूत्र तो किसी गांव में ही ढूंढे जा सकते हैं। वे कहते हैं कि आने वाला युग ग्रामयुग होगा जिसकी अभिव्यक्ति विकेन्द्रीकरण, विविधीकरण, बाजारमुक्ति और अंततः प्रकृति केन्द्रित विकास के रूप में होगी। नई व्यवस्था में शहर भी रहेंगे किंतु उनकी भूमिका गांवों के शोषक की नहीं बल्कि पूरक की होगी। साथ ही गांव भी आज के और अतीत के गांवों से अलग होंगे।

अपने इसी निष्कर्ष को व्यवहारिक रूप देने के लिए गोविन्दाचार्य ने तिरहुतीपुर गांव से एक नई यात्रा शुरू की है। मिशन से जुड़े लोगों के अनुसार इस यात्रा में अभी उनके साथ कुछ गिने-चुने जुनुनी कार्यकर्ता हैं, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब उनके पीछे एक कारवां चलेगा। मिशन तिरहुतीपुर को इसी संदर्भ में देखा और समझा जाना चाहिए।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

Recent Posts

प्रहलाद जोशी देश के नए शिक्षा मंत्री

Bharat varta Desk धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी फिलहाल प्रह्लाद… Read More

1 week ago

सीजेपी ने छात्र आंदोलन खत्म करने का किया ऐलान

Bharat varta Desk दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय से चल रहा… Read More

1 week ago

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

Bharat varta Desk जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र… Read More

1 week ago

NTA के 47 कर्मचारी बर्खास्त

Bharat varta Desk NEET पेपर लीक मामले में छात्रों के प्रदर्शन के बीच एनटीए ने… Read More

1 week ago

केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को हटाया, एनटीए प्रमुख प्रदीप जोशी कब हटेंगे?

Bharat Varta Desk दिल्ली में चल रहे NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन… Read More

1 week ago

पीएम आवास के सामने धरने पर बैठे राहुल और प्रियंका

Bharat varta Desk राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर मंगलवार… Read More

2 weeks ago