
नई दिल्ली। भारत के 118 ऐप पर प्रतिबन्ध के फैसले से भारत के ऐप बाजार में चीनी कंपनियों को काफी आर्थिक नुक्सान होगा, क्योंकि 118 ऐप में से ज्यादातर का मालिकाना हक चीन का है या उनकी कंपनियों की 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है। प्रतिबन्ध का चीन की बड़ी डिजिटल कंपनी श्याओमी, टेंसेंट, अलीबाबा और चीन का गूगल माना जाने वाले बाइदू पर व्यापक असर पड़ेगा।
चीन की कंपनी टेंसेंट का पबजी में भारी निवेश है। जुलाई 2020 तक पबजी की ग्लोबल रेवन्यू करीब 22,000 करोड़ तक पहुंच गयी थी। भारत पबजी के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। उसके कुल डाउनलोड का 24% भारत में किया गया था। उसका करीब 8.4 करोड़ डॉलर का राजस्व भारत से आता है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत ने जो प्रतिबन्ध लगाया है वो पुराने बैन से ज्यादा महत्वपूर्ण है। इससे चीन को आर्थिक नुक्सान ज्यादा होगा और देश में डिजिटल सिक्युरिटी भी बढ़ेगी।
एक व्यापारी संगठन ने आईटी मंत्री को चिठ्ठी लिखकर मांग की है कि 5जी नेटवर्क से भी चीनी कंपनियों को बाहर रखा जाये। संगठन के अनुसार चीन अपनी टेक्नोलॉजी के द्वारा जासूसी करता है, 5जी नेटवर्क एक विशाल नेटवर्क होगा। अनेक सूचनाएं उस पर होंगी जो सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होंगी, इसलिए चीनी कंपनियों को तत्काल प्रभाव से बैन किया जाये।
भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव और भारतीय बाजार में चीनी सामानों के आयात पर लगाई जा रही सीमित रोक के कारण जुलाई तक भारत में चीनी आयात लगभग एक-चौथाई गिर चुका है। पहले 7 महीने में कुल व्यापार में 18.6% की गिरावट आई है। तनाव जल्दी खत्म नहीं हुआ तो आर्थिक संबंध और कमज़ोर होंगे।
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