
भागलपुर से राहुल भारती
भागलपुर जिले के कहलगांव से लेकर पीरपैंती तक के इलाके में मिर्च की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इस इलाके को मिर्च का कटोरा कहते हैं। हजारों किसान इसकी खेती से जुड़े हैं मगर इस बार बाढ़ और बारिश ने मिर्च की फसल को बर्बाद कर दिया है। किसान औंधे मुंह गिरे हैं। इस इलाके की मिर्च बांग्लादेश और नेपाल तक जाती है। हर साल करोड़ों का कारोबार होता है।
दोहरी मार
किसानों को प्रकृति की दोहरी मार पड़ी है। बारिश व बाढ़ ने दो हजार हेक्टेयर में लगे मिर्च के पौधे को तबाह कर दिया। छोटे किसानों के समक्ष भूखमरी की स्थिति पैदा हो गयी है। किसान अशोक मंडल ने बताया कि पचास फीसद पौधा बारिश व पचास फीसद पौधा बाढ़ की भेंट चढ़ गया। मिर्च बेचकर साल भर तक घर का चूल्हा जलता था जो अभी ठंडा पड़ा है। अप्रेल माह में किसानों ने पौधा लगाया था। लगातार बारिश होने की वजह से कोरनी व भरनी नहीं हो पायी। इस वजह से पौधों में उचित विकास नहीं हुआ और समय पर दाने नहीं आये। शेष बर्बादी बाढ़ ने कर दी। मिर्च मंडी में इस बार लोगों के नहीं आने से पूरा बाजार सूना पड़ा है। किसानों ने बताया कि पिछले साल मिर्च की बिक्री 11000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुई थी। वहीं इस बार पैसे-पैसे को मुहताज हैं। सरकार की ओर से किसी प्रकार की प्रोत्साहन नहीं मिलने से किसानों को और अधिक कठिनाई हो रही है। एक हेक्टेयर भूमि में 40 हजार रुपए की लागत आयी है। नवंबर तक मिर्च का व्यापार चलता है जो इस वर्ष पूरी तरह से चौपट हो गया है।
मिर्च का कटोरा में कौन-कौन इलाके
मिर्च की खेती कहलगांव, शिवनारायणपुर, पीरपैंती, मिर्जाचौकी, एकचारी व घोघा आदि क्षेत्र में बहुतायत में होती है।
बांग्लादेश तक है बाजार
कहलगांव में उत्पादित मिर्च का बाजार संपूर्ण बिहार के साथ-साथ झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, असम, बंग्लादेश आदि है। बंग्लादेश में कहलगांव के मिर्च की अच्छी खासी मांग है।
ये हुये प्रभावित
मिर्च का उत्पादन नहीं होने से किसानों के साथ-साथ मजदूर, ट्रांसपोर्टर, आढ़ती, गद्दी मालिक आदि बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुये हैं।
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