नवरात्र विशेष: राजधानी पटना की रक्षिका देवी के रूप में पूजित हैं शक्तिस्वरूपा पटन देवी

  • शिव शंकर सिंह पारिजात, उप जनसंपर्क निदेशक (अवकाश प्राप्त), सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, बिहार सरकार।

नवरात्र विशेष: शक्तिस्वरूपा मां पटन देवी बिहार की राजधानी पटना की अधिष्ठात्री एवं रक्षिका के रूप में पूजित हैं जिनकी गणना 51 शक्तिपीठों में होती है। यहां आद्या माता पटना साहिब के दो स्थानों में विराजमान हैं- बड़ी पटन देवी और छोटी पटन देवी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बड़ी पटन देवी में सती की दाहिनी जंघा गिरी थी, जबकि छोटी पटन देवी में उनका पट गिरा था जिसका उल्लेख ‘देवी भागवत’ एवं ‘यंत्र चूड़ामणि’ में मिलता है। ‘यंत्र चूड़ामणि’ में वर्णित है:-
मागधे दक्षजंघा में व्योमकेशस्तु भैरवः! सर्वानन्दकरी देवी सर्वानन्दफलप्रदा!!

बड़ी पटन देवी में महाकाली, महालक्ष्मी एवं महासरस्वती की तीन प्रतिमाएं विराजमान हैं। यहां देवी सर्वानन्दकरी रूप में प्रतिष्ठित हैं, जबकि भैरव शंकर यहां व्योमकेश कहलाते हैं। मंदिर के पास एक गड्ढा है, जो पटन देवी का गड्ढा कहलाता है। कहते हैं यहीं से देवी की उक्त तीनों मूर्तियां प्राप्त हुई थीं।

बड़ी पटन देवी स्थान से करीब 3 किमी. की दूरी पर छोटी पटन देवी विराजती हैं जो अत्यंत प्राचीन मानी जाती हैं। कहते हैं कि सम्राट अशोक के काल से भी पूर्व इनका अस्तित्व था। यहां भी महालक्ष्मी, महासरस्वती तथा महाकाली की प्रतिमाएं स्थापित हैं।

छोटी पटन देवी के प्रति पुरातन काल से न सिर्फ हिंदुओं, वरन मुसलमानों की भी आस्था रही है। नवरात्रि के अवसर पर नगर के नवाबों-जमींदारों के यहां से चढ़ावे आते थे और उनके यहां मां के प्रसाद भी भेजे जाते थे। पटना के मशहूर शायर शाद अजीमाबादी के घर से भी यहां हर वर्ष फल, मेवे, कपड़ें आदि चढ़ावे के रूप में आते थे। कहते हैं कि शाह आलम और उनके बाद बादशाह अकबर के सेनापति राजा मानसिंह ने भी छोटी पटन देवी मंदिर के निर्माण-जीर्णोद्वार में हाथ बटाये थे। आज ये मंदिर भव्य रूप में खड़े हैं।

पटना की पटन देवी लोक मंगलकारी के साथ-साथ तांत्रिक देवी के रूप में भी प्रसिद्ध हैं। इस स्थान को ‘कालिक मंत्र’ की सिद्धि हेतु विशिष्ट माना जाता है। यहां वैदिक और तांत्रिक दोनों विधियों से पूजा होती है। वैदिक पूजा सार्वजनिक होती है, जबकि तांत्रिक पूजन के समय मंदिर के पट बंद कर दिये जाते हैं। यहां प्राचीन काल से बलि-प्रथा चली आ रही है।

पटन देवी की महिमा ऐसी है कि कोई भी मांगलिक कार्य शुरू करने के पहले अथवा इसके सम्पन्न होने पर श्रद्धालूगण आवश्यक रूप से यहां आते हैं। ऐसे तो दोनों मंदिरों में सालो भर भक्तों का आवागमन जारी रहता है, पर नवरात्र के दिनों में य विशेष रौनक रहती है। महाअष्टमी व नवमीं को यहां की छंटा निराली होती है। महासप्तमी को महानिशा पूजा, अष्टमी को महगौरी तथा नवमीं को सिद्धिदात्री देवी के पूजन के उपरांत दशमी को अपराजिता पूजन, शस्त्र पूजन व शांति पूजन किये जाते हैं।

मंदिर परिसर में एक योनि-कुंड है जिसके बारे में मान्यता है कि इसमें डाली जानेवाली हवन सामग्रियां सीधे भूगर्भ में चली जाती है। देवी को दिन में कच्ची और रात को पक्की भोज्य सामग्रियों के भोग लगते हैं। ऐसी मान्यता है कि नवरात्र में अर्द्धरात्रि में निशा-पूजा के बाद पट खुलते ही आरती के बाद जो मां के दर्शन करता है, उसे भगवती का साक्षात आशीर्वाद मिलता है। पटना की पटन देवी की महिमा अपरम्पार है।

Dr Rishikesh

Editor - Bharat Varta (National Monthly Magazine & Web Media Network)

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