
नवरात्रि में श्रीनवदुर्गा प्रीत्यर्थ, नित्यनैवेद्यमहाभोग
भारत वार्ता डेस्क: एकैवाहम जगत्यत्र द्वितीया का ममापरा। सैषा सृष्टि नायिका व्रह्माण्ड नायिका तथैव चमार्कण्डेय महापुराण व वेदों के अनुसार शक्ति, संपन्नता, ज्ञान,सुख,आरोग्य एवं समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए शक्ति के नौ स्वरूपों यानी माता नवदुर्गा की पूजा का महत्व बताया गया है। नवदुर्गा का अर्थ है माता दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूप। मां दुर्गा को दुर्गति का नाश करने वाली शक्ति कहा जाता है। नवरात्रि में मां दुर्गा की रात्रि में सच्चे मन से प्रेमपूर्वक की गयी आराधना विशेष फलदायी है। नवरात्रि की नौ रातों में माता दुर्गा की नौ शक्तियों के पृथक पृथक स्वरूपों की पूजा और प्रात: उनको प्रतिदिन अलग अलग भोग चडाने से माता अपने सभी भक्तों की प्रत्येक कामनाओं को पूरा कर उन्हें बल, बुद्धि, धन, यश और दीर्घ आयु का वरदान देती है। यहाँ पर हम आपको माता दुर्गा को प्रतिदिन चड़ाए जाने वाले भोग के बारे में बता रहे है जिससे आप सभी भक्तों को अवश्य ही मनोवांछित फल प्राप्त होगा।
प्रथमा दिवस नवरात्रि के दिन मां शैलपुत्री को गाय का घी अर्पित करने से भक्तों आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है उनका मन एवं शरीर दोनों ही निरोगी रहता है।
द्वितीया दिवस नवरात्रि के दिन माता ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाकर घर के सभी सदस्य इसका प्रसाद ग्रहणकरें, इससे माता के भक्तों की आयु में वृद्धि एवं परिवार के सभी सदस्यों की आकाल मृत्यु से भी रक्षा होती है।
तृतीय दिवस नवरात्रि के दिन माता चंद्रघंटा को मिश्री, खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाकर इसका प्रसाद वितरित करें, इससे माता के भक्तों के सभी दुख औरभय दूर हो जाते है ।अरोपप्रत्यारोप से मुक्ति मिलती है । मान सम्मान मिलता है।
चतुर्थ दिवस नवरात्रि के दिन मां दुर्गा कुष्मांडा के दिव्य रूप को मालपुए का भोगलगाकर अपने परिवार तथा ब्राह्मणों को इसका प्रसाद वितरित करें।इससे माता की कृपा स्वरूप उनके भक्तों को ज्ञान की प्राप्ति होती है , बुद्धि और कौशल का विकास होता है।
पांचवें दिवस नवरात्रि के दिन मां स्कंदमाता को केले का प्रसाद चढ़ाने से माता के भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है, उन्हें परम आनंद की प्राप्ति होती है ।
छठे दिवस नवरात्रि के दिन मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाकर इनकी पूजा-अर्चना करें। मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाकर उनकी सच्चे हर्दय से पूजा करने से साधक के अन्दर अद्भुत शक्ति एवं आकर्षण शक्ति का संचार होता है,पारिवारिक जीवन सुखमय होता है । उसकी समाज में सर्वत्र सराहना होती है और सम्मान मिलता है ।महुआ मधु से ललिता त्रिपुरसुन्दरी मंन्त्र द्वारा हवन पूजन से मनोनुकूल पति दाम्पत्यजीवन प्रेममय जींवन होता है।
सातवें दिवस नवरात्रि पर मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाकर प्रसाद लेने के साथ साथ योग्य ब्राह्मणों को दान करने से शोक एवं सभी पापों से मुक्ति मिलती है और भक्तों की सभी प्रकार के संकटों से भी रक्षा होती है।
महाष्टमी दिवस नवरात्रि को माता महागौरी को हलवे और नारियल का भोग लगाएं एवं नारियल का दान करें । इससे धन, वैभव की प्राप्ति होती है और संतान का उत्तम सुख प्राप्त होता है ।महानिशा पूजा शस्त्र पूजा दिव्य महा भोग अर्पित करें।
नवमी नवरात्रि के दिन माता सिद्धिदात्री को खीर एवं धान के लावे का भोग लगावे। अकाल मृत्युकी भय से भी छुटकारा मिलता है ।हवन पुर्णाहुति कुमारी पूजन कुमारी भोजन विशेष रूप से आयोजित करना चाहिये।
विजया दशमी देवी विसर्जन के दिन तिल के लड्डु का भोग लगाने एवं काले तिल के दान से समस्त रोग शत्रुओ का नाश एवं सर्वत्र विजय प्राप्त होता है। अपराजिता पूजन समी पूजन जयंती ग्रहण नीलकण्ठ दर्शन यात्रा सीमोलंघन करना है। शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाओ के साथ। आचार्य मंकेश्वर नाथ तिवारी मोबाइल 8210379212
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