
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का केंद्र बन सकता है देवघर
प्रियरंजन रांची
रांची : नेतरहाट दौरे के दौरान पिछले दिनों मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था कि वे झारखंड के पर्यटक स्थलों को वर्ल्ड क्लास का बनाएंगे. देवघर जिला ऐसा इलाका है जो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है. यहां कई ऐसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है जिनको देखने के लिए पूरी दुनिया से लोग आते हैं. देवघर में हवाई सेवा शुरू होने जा रही है. यह पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए और भी कई साधन- संसाधनों के विकास की जरूरत है. यहां प्रस्तुत है प्रमुख पर्यटक स्थलों का ब्योरा-
बैद्यनाथ धाम
बैद्यनाथ धाम झारखण्ड के देवघर जिले में स्थित राज्य का सबसे बड़ा तथा हिंदुओं के प्रमुख तीर्थस्थानों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि जब लंका के राजा रावण द्वारा भगवान् शिव का विग्रहरूप को लंका ले जाया जा रहा था, तब भगवान् शिव इस स्थान पर आकर इतने भारी हो गए थे कि उसे वह विग्रह यहीं छोडना पड़ा था। यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। वर्तमान मंदिर का निर्माण 1514-15 ई. में गिद्धौर के राजा पूरनमल द्वारा करवाया गया था। अकबर के सेनापति मानसिंह द्वारा यहाँ पर निर्मित एक मानसरोवर तालाब है। इस मंदिर के गर्भगृह के शिखर पर अष्टदल कमल के बीच में चन्द्रकांत मणि है। यहाँ भगवान शिव के शिखर पर पंचशूल स्थापित है।
करौं
देवघर जिले में अनेक ऐतिहासिक गाँव हैं। इनमें से एक अशोककालीन गाँव करौं भी है। यह बौद्ध धर्म का केन्द्र था। अशोक के पुत्र राजा महेन्द्र ने इस गाँव को बसाया था। यहाँ तालाब में सम्राट अशोक द्वारा निर्मित स्तूप तथा गाँव के आस-पास बुद्ध की अनेक प्रतिमाएँ है। इस गाँव में एक बौद्ध विहार था, जो नष्ट हो चुका है। एक अन्य मान्यता के अनुसार इस गाँव का नाम महाभारत कालीन राजा कर्ण के नाम पर पड़ा है। कर्ण द्वारा स्थापित यहाँ कर्णेश्वर मंदिर स्थित है। इस मंदिर की देख-रेख झरिया स्टेट के राजा काली प्रसाद द्वारा की जाती थी।
त्रिकुट पर्वत
यह देवघर से 16 किलोमीटर दूर दुमका रोड पर स्थित है। यहाँ अनेक गुफाएँ और झरने हैं। ऐसी मान्यता है कि लंका के राजा रावण का पुष्पक विमान इसी पर्वत पर उतरा था। परम्परा के अनुसार इस पर्वत की रचना ब्रह्मा, विष्णु और महेश द्वारा की गई थी, इसलिए इसका नाम त्रिकुट पर्वत पड़ा है। यहाँ 840 फीट की उंचाई पर पर्यटन विभाग के द्वारा रोप-वे बनाया गया है। इस पर्वत से मयूराक्षी नदी निकलती है।
नौलखा मंदिर
देवघर स्थित यह मंदिर अपने वास्तुशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। 136 फीट ऊँचा इस मंदिर का निर्माण 1936 ई. से 1948 ई. के बीच बालानन्द ब्रह्मचारी के एक अनुयायी ने किया था। इस मंदिर की बनावट बेलूर के रामकृष्ण मंदिर जैसी है। इस मंदिर के निर्माण में लगने वाले नौ लाख रूपये का वहन रानी चारूशिला ने किया था। इस स्थान पर 350 वर्ष पुराना शिवमंदिर भी है। ऐसी मान्यता है कि वाल्मीकि और रावण ने इस स्थान पर तपस्या की थी।
नन्दन पहाड़
देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर से तीन किलोमीटर पश्चिम में नंदन पहाड़ स्थित है। इस पहाड़ पर विभिन्न भगवानों को समर्पित मंदिरों का समूह है। इस पहाड़ की चोटी पर एक कुण्ड भी है। वर्तमान समय में यहाँ एक पार्क विकसित किया गया है, जिसमें रसियन झूला, भूतघर आदि निर्मित है।
रिखिया आश्रम
यह देवघर से 9 किलोमीटर दूर योग का एक महत्वपूर्ण केन्द्र है। इसकी स्थापना विश्वयोग गुरू स्वामी सत्यानन्द सरस्वती ने किया था। वर्तमान समय में उनके उतराधिकारी स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती की देख-रेख में यह योग केन्द्र संचालित है। यह आश्रम मुंगेर योग केन्द्र की एक शाखा है। यहाँ शतचंडी महायज्ञ किया जाता है।
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