
रांची: राज्य में मानव तस्करी रोकने के लिए नई रणनीति बनाई जाएगी। सरकार इस पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करेगी। लंबे समय से मानव तस्करी के शिकार दिल्ली से पिछले हफ्ते वापस लाये गये 45 बच्चों के मामलों की विस्तार से जानकारी जुटाई जा रही है। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग एक-एक लड़के और लड़कियों से उनकी पूरी कहानी जान रहा है। उनकी तस्करी के कारण और तरीके का मूल्यांकन किया जा रहा है ताकि खामियों को दूर कर मानव तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए रणनीति बनाई जा सके। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के विशेष सचिव डीके सक्सेना के मुताबिक मुक्त कर दिल्ली के विभिन्न बाल सुधार गृहों में रखे गए बच्चों से उनकी पूरी कहानी सुनी जा रही है। इससे तीन बातें साफ हुई हैं। पहला, ज्यादातर मामलों में परिचित ही चुरा कर, बहला फुसला कर या सुनहरे ख्वाब दिखा कर गांव के गरीब परिवार के नाबालिगों को दिल्ली या दूसरे महानगर ले गए। दूसरा, इनके साथ धोखा हुआ। पढ़ाई और कमाई की बात से तस्कर मुकर गए। कई मामलों में यातनायें भी दी गई हैं। तीसरी बात यह भी है कि अभिभावाकों को परिचितों ने अंधेरे में रखा। बच्चे का भविष्य बनाने की बात कह कर उन्हें बेच दिया इसकी जानकारी अभिभावकों को बहुत बाद में मिली। नाबालिगों की तस्करी पर अंकुश लगाने के साथ ही बालिग होने पर काम के सिलसिले में दूसरे राज्य जाने की स्थिति में उनकी पूरी जानकारी सरकार के पास रखी जाएगी। इसके लिए एक सिस्टम डेवलप किया जाएगा। बाहर जाने वालों का पूरा विवरण, वह किस एजेंसी के माध्यम से कितनी पगार पर किस जगह काम करेंगे। उन्हें वेतन के अलावा स्वास्थ्य, यात्रा, आवास और राशन भत्ता-सुविधा मिले। इसका लिखित समझौता हो।
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