
Bharat varta desk:
आनंद मोहन को सुप्रीम कोर्ट ने तगड़ा झटका दिया है. जी कृष्णैया हत्याकांड मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आनंद मोहन की रिहाई मामले में केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों को फटकार लगाई. साथ ही आनंद मोहन का पासपोर्ट जल्द जब्त करने का आदेश दिया.
कोर्ट ने आनंद मोहन को हर 15 दिन में स्थानीय पुलिस को रिपोर्ट करने का भी आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को अपना रुख साफ करने के लिए एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. साथ ही कहा है कि बाद में कोई और अवसर नहीं दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जी. कृष्णैया की पत्नी उमादेवी की दायर याचिका पर दिया है. अब इस मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 27 फरवरी तय की गई.
पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार राज्य को आनंद मोहन सिंह की समय से पहले रिहाई पर आगे हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए थे, जिन्हें 1994 के तत्कालीन गोपालगंज जिला मजिस्ट्रेट की हत्या के मामले में उनकी भूमिका के लिए दोषी ठहराया गया था. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की खंडपीठ ने तब एक याचिका पर आदेश पारित किया था. जिसमें बिहार जेल मैनुअल में हालिया संशोधन के माध्यम से पूर्व सांसद आनंद मोहन को दी गई छूट को चुनौती दी गई थी.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें आधिकारिक रिकॉर्ड तक पहुंच के संबंध में बिहार सरकार से संपर्क करने का निर्देश दिया और मामले को 26 सितंबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया. राज्य की ओर से पेश होते हुए बिहार के स्थायी वकील मनीष कुमार ने तर्क दिया कि रिकॉर्ड केवल अदालत के अवलोकन के लिए प्रस्तुत किए जाएंगे.
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