आईपीएस से मिजोरम के मुख्यमंत्री बनेंगे लालदुहोमा

Bharat varta desk:

मिजोरम के विधानसभा चुनाव में जोराम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) ने एकतरफा जीत दर्ज की है। ZPM ने राज्य की 40 में से 27 सीटें जीतकर सत्तारूढ़ मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) को करारी शिकस्त दी है। ZPM का नेतृत्व लालदुहोमा के हाथों में है, जिन्होंने पार्टी को सत्ता के शिखर तक पहुंचाया है और वह अब प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बन सकते हैं।

पूर्व IPS अधिकारी हैं लालदुहोमा, संभाली थी इंदिरा गांधी की सुरक्षा

लालदुहोमा एक पूर्व IPS अधिकारी हैं। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई के बाद भारतीय सिविल सेवा परीक्षा दी। 1977 में IPS बनने के बाद उन्होंने गोवा में एक स्क्वाड लीडर के तौर पर काम किया।साल 1982 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें अपना सुरक्षा प्रभारी नियुक्त किया था। तब उन्हें पुलिस उपायुक्त के रूप में विशेष पदोन्नति दी गई थी।वह राजीव गांधी की अध्यक्षता में 1982 एशियाई खेलों की आयोजन समिति के सचिव भी रह चुके हैं।

कैसे राजनीति में आए लालदुहोमा?

1984 में लालदुहोमा ने पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस में शामिल हो गए। इसी साल वे कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीते और संसद पहुंचे।उन्होंने 1988 में स्थानीय नेताओं से अनबन के बाद कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद उन्हें दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया।वह आजाद भारत में पहले सांसद थे, जिन्हें इन कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया।

कब और कैसे हुआ ZPM का गठन?

लालदुहोमा के नेतृत्व में ZPM का गठन 6 क्षेत्रीय पार्टियों के गठबंधन के रूप में हुआ था। इनमें मिजोरम पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, जोरम नेशनलिस्ट पार्टी, जोरम एक्सोडस मूवमेंट, जोरम डिसेंट्रेलाइजेशन फ्रंट, जोरम रिफॉर्मेशन फ्रंट और मिजोरम पीपुल्स पार्टी शामिल रहीं।मिजोरम में आधिकारिक तौर पर 2018 में ZPM का गठन हुआ था, लेकिन चुनाव आयोग ने जुलाई, 2019 में इसे मान्यता दी थी। इस बीच मिजोरम पीपुल्स कॉन्फ्रेंस ZPM के गठंबधन से बाहर हो गई थी।

2018 चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री को हराया

2018 विधानसभा चुनाव में लालदुहोमा ने आइजोल पश्चिम-1 और सेरछिप 2 सीटों पर जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालथनहलवा को आइजोल पश्चिम-1 सीट पर हराया था।उस वक्त ZPM को चुनाव आयोग से मान्यता नहीं मिल सकी, जिसके कारण उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतरना पड़ा। इस चुनाव में पार्टी के 8 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की।पार्टी ने खुद को MNF और कांग्रेस विकल्प के रूप में खड़ा किया था।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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