स्वास्थ्य

संकट के समय खुद को बनाएं ऐसे मजबूत, जरूर करें यह उपाय

Bharat Varta Desk: चाहे साल 2020 हो या फिर 2021 कोरोना संक्रमण के कारण बहुत से लोगों ने अपनों को खो दिया है। बल्कि ये सिलसिला बढ़ते ही जा रहा है। जीवन में आए इस बदलाव के कारण लोगों के अंदर डर और निराशा ने जन्म ले लिया है। इन हालातों में लोग तनाव की जाल में फंसते जा रहे है। लेकिन यह समय खुद को मजबूत बनाने का है ना कि डर और निराशाओं से दोस्ती करने का। इससे बाहर निकलने के लिए खुद को इस तरह तैयार करें…

नतीजों के लिए हर कोशिश की है तो चिंता क्यों करना?

अक्सर यह माना जाता है कि चिंता करके या तनाव लेकर समस्या का हल नहीं निकल सकता। लेकिन कई बार चिंता भी फायदेमंद साबित होती है। चिंता करके ही हम किसी भी बुरी खबर का सामना करने के लिए खुद को पहले से तैयार कर पाते हैं। लेकिन यदि आप नतीजों के लिए पहले ही हर संभव कोशिश कर चुके हैं तो चिंता और फिक्र करने से भी आपको कोई फायदा नहीं होगा।

जो सबसे बुरा हो सकता है, उसके बारे में विचार कर लें

निराशा का सामना करने के लिए आपको जिन चीजों की जरूरत पड़ने वाली है उन्हें इकट्‌ठा करना शुरू करें। संभावित तौर पर यह मान लें कि जो सबसे बुरा हो सकता था वही आपके साथ हुआ है। इसके बाद खुद को हर परिस्थिति का मुकाबला करने के लिए तैयार करें। नकारात्ममक नतीजों का जो भी प्रभाव आप पर पड़ सकता है उसको पहले से ही समझ लें और उसी के अनुसार व्यवहार करें।

चिंता और उम्मीद में संतुलन बैठाने का प्रयास करते रहें

भविष्य में आने वाली किसी भी तरह की बुरी खबर के लिए अपनी तैयारी रखना भी काम करता है, लेकिन यह पूरी सकारात्मकता के साथ करना चाहिए। वर्तमान पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। इसके लिए बेहद जरूरी है समझदारी, सामाजिक सहयोग और सकारात्मक रवैया। चिंता करना स्वाभाविक है लेकिन इसके साथ उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए।

माहौल बदलें, अपना मन और ध्यान कहीं और लगाएं

विपरीत परिस्थितियों में खुद को व्यस्त रखा जा सकता है। सबसे अच्छा तरीका है ध्यान बांटना। समय काटने के लिए ऐसी फिल्में देखी जा सकती हैं जो अलग हों, मजेदार हों और जो आपको हंसा सकें। गहरी और लंबी सांसें लें। सांस पर फोकस करें। अकेले बैठकर मेडिटेशन भी किया जा सकता है। इसके अलावा थोड़ा पैदल चलें या दौड़ें। ऐसे काम करें जो आपके दिमाग और शरीर को ऊर्जा दें। धार्मिक पुस्तकें पढ़ें, इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होगा। अपने सम्बंधियों व मित्रों के सम्पर्क में रहें और उनका हालचाल जानते रहें।

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Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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