पॉलिटिक्स

यदि प्रधानमंत्री ने हस्तक्षेप नहीं किया तो एनडीए का टूटना तय


Bharat varta desk: बिहार में सियासी सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हस्तक्षेप नहीं किया तो एनडीए का टूटना तय माना जा रहा है हालांकि यह बात आ रही है कि कल गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बातचीत की है मगर इससे एनडीए को टूट बचाने के लिए प्रभावकारी हल नहीं ढूंढा जा सका है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आज जनता दल यू ने 11 बजे दिन में सांसद और विधायकों की अहम बैठक बुलाई है जिसमें भाजपा से अलग होने का फैसला लिया जा सकता है।

अब आगे दोस्ती संभव नहीं!

जनता दल यू और भाजपा की दोस्ती अब आगे चलने वाली नहीं है, यह जानकारी हर ओर से आ रही है। खासतौर से ललन सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद जनता दल यू भाजपा से संबंधों को लेकर काफी सतर्क है। पिछले दिनों राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने यह कहकर खलबली मचा दी है कि पिछले विधानसभा चुनाव में जनता दल यू को तोड़ने की साजिश हुई थी। इस साजिश में शामिल होने का आरोप झेल रहे जनता दल यू में कद्दावर नेता पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। मगर उसके बाद भी अब जनता दल यू भाजपा के साथ रहकर किसी भी तरह के भीतरघात को झेलने को तैयार नहीं है

नीतीश का आरजेडी के साथ फिर से जाना लोगों को हैरान करने वाली बात

लेकिन नीतीश और उनकी पार्टी इतनी आसानी से एक बार फिर राष्ट्रीय जनता दल से दोस्ती गांठ सकते हैं यह बात जल्दी किसी के गले से नहीं उतर रही है। राष्ट्रीय जनता दल के साथ जनता दल यू सरकार चला पाएगा, इसमें भी लोगों को भारी संदेह है। राजद के नेता तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भारी हमलावर रहे हैं और कई बार विधानसभा में उन्हें अपमानित भी किया है। पार्टी के अध्यक्ष ललन सिंह भी शुरू से राजद सुप्रीमो लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के निशाने पर रहे हैं। एक बात और महत्वपूर्ण यह है कि जिस रेलवे घोटाले में नाम आने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी से नाता तोड़ा था वह घोटाला आज भी जिंदा है। उसी घोटाले में सीबीआई ने लालू परिवार के नजदीकी भोला यादव को पिछले दिनों जेल भी भेजा है। ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राजद के साथ एक बार फिर सरकार बनाना राजनीति की नई परिभाषा लिखने जैसा है मगर कहा जाता है कि राजनीति में सब कुछ संभव है।

तत्काल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही रहेंगे

जो खबरें आ रही है उसके मुताबिक कांग्रेस ने बिना शर्त नीतीश कुमार को समर्थन देने का ऐलान किया है। यह बात भी आ रही है कि नीतीश ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी बातचीत की है। नई सरकार में फिर से तेजस्वी यादव उप मुख्यमंत्री हो सकते हैं। बहरहाल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही रहेंगे।

ललन सिंह नीतीश को प्रधानमंत्री का चेहरा बनाने की तैयारी में

यह बताया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी से नाता तोड़ने के पीछे जनता दल यू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह का लक्ष्य मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री का चेहरा बनाना है। कुछ लोगों का दावा है कि बाद में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री का पद छोड़कर राष्ट्रीय राजनीति में दिल्ली कैंप करेंगे और देशभर में घूम घूम कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सारे विपक्ष को एकजुट करेंगे। वर्ष 2024 के चुनाव में नीतीश कुमार को नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा बनाया जा सकता है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार ऐसा करने के लिए ललन सिंह काफी दिनों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रेरित करते रहे हैं। आरसीपी सिंह के आउट होने के बाद फिलहाल जनता दल यू में राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में ललन सिंह हावी हैं, इसीलिए वे अपनी बरसों पुरानी चाहत को अमली जामा पहनाना चाहते हैं।

क्या तेजस्वी को सौंप सकते हैं कुर्सी

यह जानकारी भी आ रही है कि कुर्सी कुमार और पलटू राम जैसे आरोपों से बचने के लिए हो सकता है अभी ही नीतीश मुख्यमंत्री की कुर्सी तेजस्वी यादव को सौंप दें। दो उप मुख्यमंत्री जनता दल यू की ओर से हो मगर इस तरह की अटकलबाजी के सही साबित होने की संभावना कम दिख रही है लेकिन कुल मिलाकर इतना तय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यदि मजबूत हस्तक्षेप किया तो अभी भी नीतीश कुमार मान सकते हैं और एनडीए बच सकता है अन्यथा आज बिहार की सत्ता में महत्वपूर्ण बदलाव आना तय माना जा रहा है यानी कि एनडीए गठबंधन का टूटना पक्का है। नई परिस्थितियों का सामना करने के लिए बिहार के राज्यपाल समेत कई वरिष्ठ नेताओं को केंद्रीय नेतृत्व ने दिल्ली बुला लिया है।


Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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