मांझी और सहनी का मिलना गुल खिलाने की नहीं बल्कि अपनी पूछ बढ़ाने की रणनीति है, पढ़िए भारत वार्ता की खास रिपोर्ट

Bharat Varta Desk: हम पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और वीआईपी के नेता व पशुपालन मंत्री मुकेश सहनी के बीच शनिवार को हुई मुलाकात बिहार के सियासी गलियारे में चर्चा का विषय बनी हुई है. दोनों नेताओं ने इस मुलाकात को एक शिष्टाचार मुलाकात बताने के साथ ही यह भी कहा है कि पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने के सवाल पर उनके बीच बात हुई है.

पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग

इस मुलाकात के पहले जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग कर चुके हैं कि यदि समय पर चुनाव नहीं हो सके तो पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 6 महीने बढ़ा दिया जाना चाहिए. कल मंत्री मुकेश सहनी ने भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने के लिए दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई. उन्होंने जीतन राम मांझी की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ना चाहिए.

सरकार की स्थिरता को लेकर सवाल

कयास में दम नहीं है लेकिन कुछ लोग इस मुलाकात को अनावश्यक महत्व दे रहे हैं और इसको लेकर बिहार की एनडीए सरकार की स्थिरता पर सवाल खड़े कर रहे हैं. कुछ लोगों का यह भी दावा है कि दोनों नेताओं का मिलना बिहार की राजनीति में गुल खिला सकता है. मगर तटस्थ राजनीतिक विशेषज्ञ इन तमाम संभावनाओं को खारिज करते हैं. उनका मानना है कि दोनों नेताओं का मिलना महज औपचारिकता भर है. जैसा कि जीतन राम मांझी की पार्टी हम के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने भी कहा कि मंत्री अक्सर पूर्व मुख्यमंत्री माझी जी से मिलते रहते हैं. यह मुलाकात भी उनकी शिष्टाचार मुलाकात है.

महत्त्व पाने की रणनीति

राजनीति के जानकारों का कहना है कि दोनों नेता पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग उठाकर सरकार में अपनी पूछ बढ़ाना चाहते हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार को दोनों नेता सहयोगी दल के प्रधानों के रूप में सहयोग कर रहे हैं मगर सरकार में उनका महत्व या दबदबा नहीं है जो एक सहयोगी दल का होना चाहिए. इसीलिए खास तौर से पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी बीच-बीच में ऐसा बयान देते रहते हैं ताकि मुख्यमंत्री उनकी नोटिस ले. जैसे कि कल उन्होंने सरकार के लॉकडाउन पर ही सवाल खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन कोरोना का समाधान नहीं है. स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएं बढ़ानी चाहिए. इसके पहले जीतन राम मांझी की बहू भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी और लालू की बेटी के बीच छिड़े ट्यूटर वार में कूद पड़ी. उन्होंने लालू प्रसाद की बेटी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. जानकारों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी अपने परिवार के दूसरे सदस्यों का भी सत्ता में एडजस्टमेंट चाहते हैं. मुख्यमंत्री की ओर से उनकी मांग अनसुनी की जा रही है.

मुकेश सहनी भी उपेक्षित
वहीं दूसरी ओर मंत्री मुकेश साहनी को भी सरकार में कोई भाव नहीं मिल रहा है. उनकी कई मांगें पटना से लेकर दिल्ली तक अनसुनी रह यही नहीं जब जब यह चर्चा होती है कि मुकेश सहनी की पार्टी एनडीए को छोड़कर महागठबंधन के पक्ष में जा सकती है तब तब यह भी चर्चा होने लगती है कि उनके पार्टी के सभी विधायक भाजपा की ओर भी जा सकते हैं. इन चर्चाओं में कितनी सच्चाई और कितना दम है यह तो उस समय पर पता चलेगा मगर एनडीए के नेताओं का दावा है कि हम और वीआईपी एनडीए के साथ मजबूती से हैं और आगे भी रहेंगे.

मिलने के कोई खास मायने नहीं

इसीलिए कल दोनों नेताओं के मिलने का कोई निहितार्थ नहीं है और ना ही इससे कोई राजनीतिक गुल खिलने वाला है. जितनी भी बातें हो रही है सब झूठी राजनीतिक कयास है.

पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ना मुख्यमंत्री की इच्छा पर

जहां तक कि पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने का सवाल है तो उसके पक्ष में पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी भी दिख रहे हैं जो भाजपा कोटे के मंत्री हैं मगर यह सर्वविदित है कि कार्यकाल तभी बढ़ेगा जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इच्छा होगी जो समय पर पता चलेगा. बिहार की राजनीति को जानने वाले यह साफ तौर पर जानते हैं कि कोई कुछ कर ले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी शर्तो पर ही मुख्यमंत्री बने हुए हैं और सरकार चला रहे हैं. इसलिए जो कुछ भी होगा वह किसी के दबाव बनाने से नहीं मुख्यमंत्री और उनके खास लोगों का मन होने पर.

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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