
Bharat Varta Desk: बिहार के विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार के एक से एक कारनामे उजागर हो रहे हैं। भ्रष्टाचार के आरोपी व्यक्ति को कुलपति बना दिया। कुलपति के रूप में बिहार में भी भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे तो उन्हें बेस्ट वाइस चांसलर अवार्ड भी दे दिया। कल राजभवन में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के जिस कुलपति एसपी सिंह को चांसलर अवार्ड से नवाजा गया उनकी नियुक्ति पर भी सवाल उठ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एसपी सिंह पर लखनऊ विश्वविधालय के वीसी रहते अनियमितता के आरोप में लखनऊ के हसनगंज थाने में एफ आई आर दर्ज हुई थी।
RTI एक्टिविस्ट रोहित कुमार ने राजभवन को पत्र भी लिखा है जिसमें बताया गया है कि FIR में एसपी सिंह पर धारा 420, 471 और 468 का मामला दर्ज था। ऐसे व्यक्ति को फिर से कुलपति बनाए जाना क्या नियम सम्मत है?
दरभंगा में भ्रष्टाचार किया तो दे दिया चांसलर अवार्ड
कुलपति एसपी सिंह पर उत्तर पुस्तिकाओं की खरीद में घपले का आरोप लगा है। यह मामला और कोई नहीं मौलाना मजहरूल अरबी फारसी विश्वविद्यालय के कुलपति ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर लगाया है। जब एसपी सिंह अरबी फारसी विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति हुआ करते थे तो उन्होंने ₹700 मूल्य वाली उत्तर पुस्तिका को ₹16 में खरीदने का आदेश दिया था। उस कुलपति को राजभवन में कल चांसलर अवार्ड से नवाजा है। इसकी शिकायत देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक गई है।
कुलपति पर टेंडर घोटाले का आरोप
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में टेंडर घोटाले का खुलासा और कोई नहीं सत्तारूढ़ दल भाजपा के विधायक संजय सरावगी ने ही की है। इसके बाबत उन्होंने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार को 1 जून को ही पत्र लिखा था जिसमें टेंडर में भ्रष्टाचार किए जाने की शिकायत की थी। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग को बताया था कि चहारदीवारी, केंद्रीय लाइब्रेरी भवन, गांधी सदन के सामने तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य के लिए 2 करोड़ 56 लाख के निविदा निकालने में घोर अनियमितता हुई है। टेंडर के पहले ठेकेदार ने काम शुरू करवा दिया था। नियम के अनुसार इन कामों का ईटेंडर होना चाहिए था।
विश्वविद्यालय ने टेंडर को प्रकाशित नहीं करवाया। विधायक ने ये भी लिखा है कि बिहार सरकार का निर्णय था कि राज्य अलग-अलग विवि में 50 लाख से ऊपर के कार्य बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत सरंचना विकास निगम द्वारा करवाए जाएंगे लेकिन, विवि ने बिहार सरकार के नियम को नहीं मानते हुए इसका उल्लंघन किया। ऐसे कुलपति को चांसलर अवार्ड से नवाजा जाना कई सवालों को जन्म दे रहा है।
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