बड़ी खबर

बेल नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट ने जज को दी सजा, भेज दिया ज्यूडिशियल एकेडमी, कहा- स्किल सुधारो

Bharat Varta desk: सुप्रीम कोर्ट ने एक सामान्य मामले में जमानत नहीं देने वाले जज की जिम्मेदारी को वापस लेते हुए उन्हें न्यायिक अकादमी में भेजने का निर्देश हाईकर्ट को दिया है। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने
3 मई, 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट को उक्त जज के संबंध में ऐसा करने को कहा।

21 मार्च को ही सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि उसके आदेश का पालन नहीं करने की स्थिति में मजिस्ट्रेट का न्यायिक कार्य वापस ले लिया जाएगा। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कहा था कि ऐसा बार-बार करने पर मजिस्ट्रट को ज्यूडिशियल एकेडमी में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। इस दौरान, वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा अप्रैल के उन दो मामलों को कोर्ट के संज्ञान में लेकर आए, जिसमें जमानत खारिज कर दी गई थी।

जिन दो मामलो में सुप्रीम कोर्ट ने जज को यह सजा सुनाई है, उनमें से एक केस शादी में विवाद से जुड़ा है। इस केस में सेशन जज ने एक आरोपी, उसके माता-पिता और भाई की अग्रिम जमानत याचिक को खारिज कर दिया, जबकि उनकी गिरफ्तारी भी नहीं हुई थी। दूसरे केस में आरोपी कैंसर से पीड़ित था और गाजियाबाद की एक सीबीआई अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया।

पीठ ने दोनों मामलों पर निराशा जताते हुए कहा, “न्यायिक अधिकारियों द्वारा बड़ी संख्या में ऐसे आदेश पारित किए गए हैं जो हमारे आदेश के अनुरूप नहीं हैं।” पीठ ने कहा, “इस अदालत द्वारा दिया गया फैसला देश का कानून है और इसका पालन करना होगा। इसका पालन न करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उत्तर प्रदेश में स्थिति चिंताजनक है। 10 महीने पहले फैसला सुनाए जाने के बावजूद कई मामलों में इसका पालन नहीं किया जा रहा है।”


कोर्ट ने कहा, “21 मार्च को हमारे पिछले आदेश के बाद भी लखनऊ की एक अदालत ने इसका पूरी तरह से उल्लंघन करते हुए एक आदेश पारित किया था … हम इस आदेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट के संज्ञान में लाते हैं … हाई कोर्ट को इसमें कार्रवाई करने की जरूरत है और ज्यूडिशियल एकेडमी में उनकी स्किल बढ़ाने के लिए जो भी जरूरी है, वो करें।” कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में पुलिसिया शासन की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने पिछले साल जुलाई में कई निर्देश पारित किए थे। इसमें कोर्ट ने कहा कि जहां कस्टडी की आवश्कता ना हो तो सात साल से कम की सजा के प्रावधान वाले केसों में गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है तो, उसे चार्जशीट दाखिल करने के बाद ही हिरासत में लिया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि ट्रायल कोर्ट की जिम्मेदारी है कि संविधान की गरिमा को बनाए रखें।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

Recent Posts

27 IAS-IPS अधिकारियों का ट्रांसफर, विकास वैभव मगध रेंज के आईजी बनें

Bharat varta Desk बिहार की NDA सरकार ने रविवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और… Read More

1 day ago

पांच मत्रियों संग सुवेंदु अधिकारी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

Bharat varta desk शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली… Read More

3 days ago

सुवेंदु अधिकारी होंगे बंगाल के सीएम

Bharat varta Desk पश्चिम बंगाल के नए सीएम का सस्पेंस खत्म हो गया है. भारतीय… Read More

3 days ago

गृह मंत्री अमित शाह पटना पहुंचे, कल होगा सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल का शपथ गहण

Bharat varta Desk बिहार में सियासी हलचल के बीच कल यानी 7 मई को राजधानी… Read More

5 days ago