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बिहार के 12 जिलों में इंटरनेट सेवा बंद, सियासत गरमाई, गिरिराज ने राजद पर लगाया आरोप, नीतीश और जनता दल यू पर भी सवाल खड़े कर रहे कुछ लोग

पटना, भारत वार्ता संवाददाता : अग्निपथ भर्ती योजना को लेकर हो रहे हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए बिहार सरकार ने 15 जिलों में इंटरनेट मीडिया पर रोक लगा दी है। यह रोक शुक्रवार को अपराह्न दो बजे से प्रभावी हो गई है, जो रविवार यानी 19 जून तक प्रभावी रहेगी। जिन जिलों में रोक लगाई गई है, उसमें कैमूर, भोजपुर, औरंगाबाद, रोहतास, बक्सर, नवादा, पश्चिमी चंपारण, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मोतिहारी, लखीसराय, बेगूसराय, वैशाली और सारण शामिल है। गृह विभाग की विशेष शाखा ने इस बाबत आदेश जारी कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि अपर पुलिस महानिदेशक विधि-व्यवस्था और अन्य स्रोतों से जानकारी मिली है कि कुछ असामाजिक तत्व इंटरनेट सेवा का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

सरकार की चुप्पी पर सवाल
हिंसा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी सरकार के साथ-साथ बिहार की प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं। बिहार के दर्जनों रेलवे स्टेशन और रेल संपत्तियों को अराजक तत्व निशाना बनाते रहे मगर राज्य सरकार और प्रशासन व पुलिस मुकदर्शक बने बने रहे। जनता दल यू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने बजाप्ता बयान जारी कर केंद्र सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का सलाह दे डाली। आज जब बिहार के कई हिस्से जल रहे थे तो नीतीश सरकार कैबिनेट की बैठक कर रही थी।

कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि ऐसे तत्वों को जनता दल यू का मौन समर्थन मिल रहा है वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री गिरधार सिंह ने राजद पर आरोप लगाया कि वह हिस्सा की घटनाओं को बढ़ा रहा है।

कल भारत बंद
केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ विरोधी दलों ने भारत बंद का आह्वान किया है। इसको लेकर गृह मंत्रालय ने विशेष रुप से केंद्रीय संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में अपनी एजेंसियों को सतर्क किया है। रेलवे में रेल सुरक्षा बल को विशेष रूप से मुस्तैद रहने को कहा गया है। बिहार में सरकार में शामिल एक दल भी बंद को समर्थन दे रहा है।

रेलवे को अरबों का नुकसान, दानापुर में भी भारी क्षति, केंद्र सरकार गंभीर-3 दिनों के प्रदर्शन और हिंसक घटनाओं के दौरान बिहार में रेलवे को अरबों का नुकसान हुआ है। 1 दर्जन से अधिक ट्रेनें तहस-नहस कर दी गईं हैं। कई स्टेशनों को ध्वस्त कर दिया गया है। रेल पटरियों को नुकसान पहुंचाया है। केवल दानापुर स्टेशन की क्षति का आकलन किया जाए तो सैकड़ों करोड़ में पहुंच सकती है। गृह मंत्रालय इन घटनाओं को लेकर गंभीर है। इस मामले में बिहार के शासन की भूमिका पर भी गौर किया जा रहा है।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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