
नई दिल्ली . अयोध्या ढांचा विध्वंस मामले में लखनऊ की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. बाबरी मस्जिद विध्वंस केस- पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार समेत सभी अभियुक्त बरी कर दिए गए. अदालत ने कहा कि यह पूर्व नियोजित मामला नहीं था. आरोपियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं है कि उन्होंने ढांचा गिराने का षड्यंत्र रचा.फैसला के समय कोर्ट परिसर के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। सीबीआई स्पेशल कोर्ट के जज एसके यादव ने ये फैसला सुनाया हैं। गौरतलब है कि उनका कार्यकाल आज हीं खत्म हो रहा है। ये उनका आखिरी फैसला है। इसके बाद वो रिटायर हो जाएंगे। उनका कार्यकाल पिछले साल खत्म हो गया था। जिसके बाद उनके कार्यकाल को एक साल के लिए बढ़ाया गया, जो आज खत्म हो रहा है। कोर्ट में सुधीर कक्कड़, बजरंग दल के पूर्व संयोजक प्रकाश शर्मा मौजूद रहें। मामले में 49 लोगों को आरोपी बनाया गया था। जिसमें से 32 आरोपी जीवित हैं। 6 को छोड़कर सभी कोर्ट में उपस्थित रहें।फैसला सुनाने के वक्त चार हाई-प्रोफाइल आरोपियों में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह कोर्ट में मौजूद नहीं रहें।अदालत परिसर की ओर जाने वाली सड़कों पर भी यातायात को बेहद नियंत्रित रखा गया है. मामले के अभियुक्तों ने अदालत परिसर में पहुंचना शुरू किया तो मुस्तैद पुलिस कर्मियों ने उनकी समुचित जांच करने के बाद ही उन्हें दाखिल होने दिया. लखनऊ के पुलिस आयुक्त सुजीत पांडे ने भी मौके पर पहुंच कर सुरक्षा बंदोबस्त का जायजा लिया.फैसला सुनाए जाने से पहले ही उमा भारती ने कहा है कि न्यायालय द्वारा जो भी सजा मुझे दी जाएगी वह मुझे स्वीकार है. राम मंदिर को लेकर मुझे जो भी सजा मिलेगी मैं स्वीकार करूंगी. उमा भारती ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर यह चुनाव समिति का सदस्य बनने की इच्छा जाहिर की. उन्होंने लिखा कि 30 सितंबर को विशेष अदालत द्वारा राम मंदिर मामले में फैसला सुनाया जाएगा. न्यायालय का जो भी फैसला होगा वह स्वीकार है. हालांकि फैसले के दौरान विशेष अदालत में उपस्थित होना था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से मैं उपस्थित नहीं हो रही हूं. मुझे राम मंदिर के लिए जो भी सजा मिलेगी मैं तैयार हूं.बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने CBI अदालत को मामले का निपटारा 31 अगस्त तक करने के निर्देश दिए थे, लेकिन गत 22 अगस्त को यह अवधि एक महीने के लिए और बढ़ा कर 30 सितंबर कर दी गई थी. सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले की रोजाना सुनवाई की थी. केंद्रीय एजेंसी सीबीआई ने इस मामले में 351 गवाह और करीब 600 दस्तावेजी सुबूत अदालत में पेश किए थे. इस मामले में कुल 48 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जिनमें से 17 की मामले की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है.इस मामले में अदालत में पेश हुए सभी अभियुक्तों ने अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को गलत और बेबुनियाद बताते हुए केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर दुर्भावना से मुकदमे दर्ज कराने का आरोप लगाया था. पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने गत 24 जुलाई को सीबीआई अदालत में दर्ज कराए गए बयान में तमाम आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि वह पूरी तरह से निर्दोष निर्दोष हैं और उन्हें राजनीतिक कारणों से इस मामले में घसीटा गया है.इससे एक दिन पहले अदालत में अपना बयान दर्ज कराने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने भी लगभग ऐसा ही बयान देते हुए खुद को निर्दोष बताया था. कल्याण सिंह ने गत 13 जुलाई को सीबीआई अदालत में बयान दर्ज कराते हुए कहा था कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सियासी बदले की भावना से प्रेरित होकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है. उन्होंने दावा किया था कि उनकी सरकार ने अयोध्या में मस्जिद की त्रिस्तरीय सुरक्षा सुनिश्चित की थी.आरोपियों की लिस्टइस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साघ्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डॉ. राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दूबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, महाराज स्वामी साक्षी, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धमेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ व धर्मेंद्र सिंह गुर्जर आरोपी हैं.
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