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पीएम मोदी के आने से पहले रेलवे ने वाराणसी को दी सौगात, मंडुवाडीह स्टेशन हुआ बनारस, संस्कृत में भी लिखा नाम

पूर्व रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा की पहल रंग लाई

वाराणसी, भारत वार्ता : वाराणसी को रेलवे से भी बड़ी सौगात मिली है। यहां के मंडुवाडीह स्टेशन की नई पहचान अब बनारस नाम से होगी। बुधवार को स्टेशन के प्‍लेटफार्म से लेकर मुख्य भवन पर बनारस के नाम का बोर्ड भी लग गया। नए बोर्ड पर हिंदी, संस्‍कृत, अंग्रेजी और उर्दू में बनारस लिख दिया गया है।

बीते दिनों केंद्रीय गृह मंत्रालय और रेल मंत्रालय ने वाराणसी के मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदले का फैसला किया था। इस संबंध में सरकार के कई स्तरों पर जरूरी कार्रवाई पूरी की जा रही थी। मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर वाराणसी किए जाने की मांग लंबे समय से लंबित थी, जिसपर विचार करने के बाद केंद्र सरकार ने नाम परिवर्तन को स्वीकृति दी थी।

स्टेशन का नाम मंडुवाडीह के स्थान पर बनारस करने की स्वीकृति रेलवे बोर्ड से मिलते ही नाम बदलने का काम भी कर दिया गया। अब इस स्टेशन का नाम हिन्दी में बनारस और अग्रेजी में BANARAS होगा। इस स्टेशन का कोड BSBS मिला है। इसके साथ ही काशी के विद्वत जन की मांग पर इस स्टेशन की नाम पट्टिका पर संस्कृत में भी इसका नाम (बनारसः) अंकित किया गया है। आज रात 12 बजे (15 जुलाई 2021) से इस स्टेशन से जारी होने वाले टिकटों पर भी स्टेशन का नाम बनारस एवं स्टेशन कोड BSBS अंकित होकर जारी होगा।

वाराणसी के साथ ही काशी और बनारस भी क्षेत्रीय लोकाचार की भाषा में प्रसिद्ध है। यहां पहले से वाराणसी, काशी और वाराणसी सिटी के नाम से तीन स्टेशन हैं। बनारस के नाम से कोई स्टेशन नहीं था। पिछले कुछ साल से शहर के बीच में स्थित मंडुवाडीह स्टेशन को नई साज सज्जा मिली तो इसका नाम बनारस करने की मांग उठने लगी।

हवाई अडडे की तरह दिखता है स्टेशन
मंडुवाडीह स्टेशन को पहले से ही किसी हवाई अड्डे की तरह बनाया गया है। नव-पुनर्निर्मित रेलवे स्टेशन किसी बड़े प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट कार्यालय की तरह दिखाई देता है। केवल देखने में ही नहीं बल्कि यात्री सुविधाएं भी इसे अलग दिखाती हैं। प्लेटफार्म तक कार व अन्य वाहनों को ले जाने की भी सुविधा है।
नए रूपांतरित स्टेशन में विशाल प्रतिक्षालय क्षेत्र, विभिन्न श्रेणियों के प्रतीक्षालय, उच्च श्रेणी यात्री विश्रामालय, एस्केलेटर सीढियां, लिफ्ट्स, फूड प्लाजा, कैफेटेरिया, वी आई पी लाउन्ज, पार्किंग, सेल्फी पॉइंट,राष्ट्रीय ध्वज, धरोहर के रूप में छोटी लाइन का इंजन, विस्तृत ग्रीन और स्वच्छ सर्कुलेटिंग एरिया, आधुनिक बुकिंग आरक्षण कार्यालय, फूड कोर्ट, सभी सुविधाओं से परिपूर्ण वेटिंग रूम और बहुत कुछ है। स्टेशन में एसी लाउंज, गैर-एसी रिटायरिंग रूम और डॉर्मिटरी भी हैं। स्टेशन परिसर की वास्तुकला काशी की आस्था को दर्शाती है। स्टेशन के परिवेश में फव्वारे और बैठने की जगह शामिल है। इस स्टेशन को उन्नत यात्री सुविधाओं के रख-रखाव के लिए आई एस ओ सर्टिफिकेशन एवं साफ- सफाई एवं कुशल प्रबंधन के लिए 5 एस सर्टिफिकेशन भी प्राप्त है।
पूर्व रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा की पहल रंग लाई
पूर्व रेल राज्य मंत्री मनोज कुमार सिन्हा की पहल ने आखिरकार रंग ला दिया। नाम को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने के चलते यात्री और सैलानियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी काशी में होने के बावजूद अंतराष्ट्रीय पटल पर लोग मंडुवाडीह स्टेशन के नाम से अनजान थे। अमूमन नाम को लेकर भ्रमवश यात्रियों को इधर- उधर भटकना पड़ता है। ऑनलाइन रेलवे टिकट बुकिंग में भी उन्हें परेशानी होती थी। अब जनपद के समानांतर मंडुवाडीह स्टेशन का नाम बदलने से कोई कठिनाई नहीं होगी।
यूं तो मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग समय- समय पर उठाई जाती रही है। लेकिन इसे मूर्तरूप देने का काम पूर्व केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज कुमार सिन्हा ने किया। उन्होंने वर्ष 2014- 15 में रोहनिया स्थित एढे गांव में आयोजित एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए मंडुआडीह स्टेशन का नाम बदलने का वादा किया था। मनोज सिन्हा ने इस दिशा में मंत्रालय की स्वीकृति प्रदान करने के पश्चात राज्य और केंद्र को फ़ाइल बढ़ा दिया था। कैस बनारसी फाउंडेशन और जनजागृति समिति ने भी नाम बदलने की वकालत की थी।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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