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पारस अस्पताल प्रबंधन पर चले हत्या का मुकदमा, टेकओवर करे सरकार, दुष्कर्म पीड़िता की बेटी ने उठाई आवाज


Bharat Varta desk
पटना के पारस अस्पताल में दुष्कर्म पीड़िता की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत के बाद उसकी बेटी ने न्याय की गुहार लगाई है. उसका कहना है कि उसकी मां को अस्पताल प्रबंधन ने एक साजिश के तहत मार दिया है. इसलिए इस मामले में अस्पताल प्रबंधन पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए और यह अस्पताल बंद होना चाहिए. बेटी का कहना है कि कोरोना संक्रमित उसकी मां के साथ 3 लोगों ने मिलकर गलत किया जिसकी उसने शिकायत की और मामले को सार्वजनिक किया और अस्पताल में पुलिस पहुंची तो नाराज होकर अस्पताल प्रबंधन ने जानबूझकर उसकी मां के साथ कुछ ऐसा किया जिसके कारण उसकी मौत हो गई. जबकि उस समय तक उसकी मां की हालत ठीक थी.

सीएम के गांव की रहने वाली

यहां बता दें कि यह लड़की मुख्यमंत्री के गांव कल्याण विगहा की रहने वाली है. 15 मई को उसकी मां अस्पताल में भर्ती हुई और 18 मई को उसकी मौत हो गई. उस लड़की के पास वह वीडियो भी है जिसमें कि 3 लोगों उसकी मां के साथ गलत करते दिख रहे हैं. लड़की ने कहा है कि यह साफ तौर पर मर्डर है. हालांकि पुलिस इस मामले की जांच कर रही है लेकिन पारस अस्पताल प्रबंधन के प्रभाव के आगे पुलिस कितना टिक पाती है यह समय बताएगा.

पप्पू यादव ने कहा हत्या हुई है

उधर अपहरण केस में जेल जाने के बाद अस्पताल में इलाज करा रहे पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने ट्वीट करके कहा है कि मुख्यमंत्री के गांव की रहने वाली इस महिला की हत्या हुई है. उसका ऑक्सीजन लेवल ठीक था. कोरोना संक्रमित इस महिला की सामान्य तौर पर स्थिति अच्छी थी मगर दुष्कर्म की शिकायत सार्वजनिक होने पर अस्पताल प्रबंधन ने उसे जानबूझकर वेंटिलेटर पर रख दिया. पप्पू यादव ने मांग किया है कि सरकार इस अस्पताल को जल्द टेक ओवर करे.

पारस अस्पताल के कारनामे पहले भी चर्चा में
लड़की के आरोप में कितनी सच्चाई है यह तो पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी मगर पारस अस्पताल प्रबंधन के कुकर्म पहले भी उजागर होते रहे हैं. पिछले साल पूर्व मंत्री श्याम रजक के इलाज के नाम पर पारस अस्पताल का रवैया सामने आया था. लोगों का यहां तक आरोप है कि लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इस अस्पताल में पैसे वसूले जाते हैं. हालांकि पारस अस्पताल प्रबंधन ऐसे आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है. अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यहां के बेहतर और उच्चस्तरीय इलाज के कारण हजारों लोगों की जान बच रही है. दुर्भावना से ग्रस्त होकर कुछ लोग ऐसे अनाप-शनाप आरोप लगाते हैं.

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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