धार्मिक दर्शन नवरात्रि में –सैकड़ों वर्ष पुराना है मां मनसा देवी का इतिहास

मां मनसा करती हैं हर कष्टों का हरण लाखों की तादाद में जमा होते हैं भक्त नवरात्रि में

NEWSNLIVE DESK: नवरात्र के पावन मौके पर हम आपको पंचकूला के मशहूर माता मनसा देवी मंदिर का इतिहास बताने जा रहे है, जो अपने आप में बेहद खास है। इस मंदिर का इतिहास बड़ा ही प्रभावशाली है। माता मनसा देवी मंदिर में चैत्र और आश्विन मास के नवरात्रों में मेला लगता है। जिसके चलते यहां लाखों की तादाद में श्रध्दालु आते हैं। यहां लोग माता से अपनी मनोकामना को पुरा करने के लिए आशिर्वाद लेते हैं। माना जाता है कि माता मनसा देवी से मांगी गई हर मुराद माता पूरी करती है।

मंदिर तक आती थी 3 किमी लम्बी गुफा
कहा जाता है कि जिस जगह पर आज मां मनसा देवी का मंदिर है, यहां पर सती माता के मस्तक का आगे का हिस्सा गिरा था। मनसा देवी का मंदिर पहले मां सती के मंदिर के नाम से जाना जाता था। मान्यता है कि मनीमाजरा के राजा गोपालदास ने अपने किले से मंदिर तक एक गुफा बनाई हुई थी, जो लगभग 3 किलोमीटर लंबी है। वे रोज इसी गुफा से मां सती के दर्शन के लिए अपनी रानी के साथ जाते थे। जब तक राजा दर्शन नहीं नहीं करते थे, तब तक मंदिर के कपाट नहीं खुलते थे।
पौने दो सौ साल पहले राजा ने बनवाया था मंदिर
माता मनसा देवी का इतिहास उतना ही प्राचीन है, जितना कि अन्य सिद्ध शक्तिपीठों का। माता मनसा देवी के सिद्ध शक्तिपीठ पर बने मदिंर का निर्माण मनीमाजरा के राजा गोपाल सिंह ने अपनी मनोकामना पूरी होने पर आज से लगभग पौने दो सौ साल पहले चार साल में अपनी देखरेख में सन‌् 1815 में पूर्ण करवाया था।

मुख्य मदिंर में माता की मूर्ति स्थापित है। मूर्ति के आगे तीन पिंडियां हैं, जिन्हें मां का रूप ही माना जाता है। ये तीनों पिंडियां महालक्ष्मी, मनसा देवी तथा सरस्वती देवी के नाम से जानी जाती हैं। मंदिर की परिक्रमा पर गणेश, हनुमान, द्वारपाल, वैष्णवी देवी, भैरव की मूर्तियां एवं शिवलिंग स्थापित है। हरियाणा सरकार ने मनसा देवी परिसर को 9 सितम्बर 1991 को माता मनसा देवी पूजा स्थल बोर्ड का गठन करके इसे अपने हाथ में ले लिया था।

मुगलकाल में श्री माता मनसा देवी सहित राज्य के अन्य तीर्थ स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं से सरकार एक रुपये कर वसूलती थी। ये बात है करीब सवा चार सौ साल पूर्व की। जब मुगलकालीन बादशाह सम्राट अकबर का शासन था। उस समय लोगों और महंत मनसा के संगत में आए संतों ने इसकी शिकायत सम्राट अकबर से की।लोगों की पूरी बात सुनने के बाद सम्राट अकबर ने सभी तीर्थ स्थानों पर कर वसूली पर रोक लगाने का हुक्म दिया। जिसके बाद कुरुक्षेत्र एवं मनसा देवी में आने वालों के लिए कर वसूली समाप्त कर दी गई। इसका उल्लेख आइने अकबरी में किया गया है। बता दें कि यही महंत मनसा नाथ हैं, जिनके नाम पर मनसा देवी का पड़ा। इसका जिक्र भी एक कथा में किया गया गया है। बिलासपुर गांव में देवी भक्त महंत मनसा नाथ रहते थे। उस समय यहां देवी की पूजा अर्चना के लिए दूर-दूर से लोग आते थे।

डॉ सुरेंद्र

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