
रांची संवाददाता: झारखंड में खाली पड़े बोर्ड, निगम को भरने की अंदरूनी कवायद राज्य सरकार के स्तर से तेज कर दी गई है। खरमास के कारण राज्य सरकार के स्तर पर फौरी तौर पर इस प्रक्रिया को टाला गया था। अब खरमास बीत चुका है। जाहिर है अब रुकी पड़ी इस प्रक्रिया को सत्ताधारी दल आपसी सहमति से पूरा करेंगे। इसके अलावा 20 सूत्री समितियों के गठन की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। कांग्रेस के प्रभारी आरपीएन सिंह की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से वार्ता के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है। खाली पड़े बोर्ड निगम को भरे जाने को लेकर आपसी सहमति से एक फार्मूला तय किए जाने की बात कही जा रही है। यह फामूर्ला सत्ताधारी दलों की सरकार की उनकी हैसियत के आधार पर ही होगा। इस आधार पर यह तय माना जा रहा है कि 60 फीसद कोटा झामुमो के खाते में जाएगा। शेष कांग्रेस और राजद के कोटे में जाने की बात कही जा रही है। बोर्ड-निगम के बंटवारे के क्रम में ज्यादातर विधायकों को एडजस्ट किए जाने की बात कही जा रही है। बता दें कि झारखंड में करीब तीन दर्जन बोर्ड-निगम हैं। इसमें ज्यादातर में शीर्ष पद रिक्त हैं। जिन्हें सरकार में शामिल घटक दल आपसी सहमति से भरे जाएंगे।
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