
पटना से ऋषिकेश नारायण।
2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ-साथ देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की भी जयंती होती है। जहां गांधी जी सत्य और अहिंसा के लिए मशहूर थे तो वहीं शास्त्री जी अपनी ईमानदारी, विनम्रता और सादगी के लिए जाने जाते थे। इसी से जुड़ा एक किस्सा लोगों में काफी चर्चित है, जब उन्होंने लोन लेकर कार खरीदी थी।
1965 की बात है, हमारे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने एक फ़िएट गाड़ी ख़रीदी, पंजाब नेशनल बैंक से 5 हजार रुपये का लोन लेकर। सादा जीवन व्यतीत करने वाले शास्त्री जी ने जब कार खरीदी थी तब उनके बैंक में केवल 7 हजार रुपए थे जबकि उस समय एक फ़िएट कार की कीमत 12 हजार रुपए थी। जब उनका लोन जल्दी पास हो गया तो उन्होंने इस पर कहा, “आम आदमियों का लोन भी इतनी जल्दी पास हो जाता तो कितना अच्छा होता”।
दुर्भाग्यवश अगले वर्ष उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया और वह लोन का पैसा नहीं दे पाए। बैंक वालों ने उनकी विधवा पत्नी ललिता शास्त्री को पत्र लिखकर लोन के विषय में बताया, उन्होंने वो लोन अपनी पेंशन से भरने का वादा किया। उनकी पत्नी ने बैंक की पाई-पाई लौटा दी, वो फ़िएट गाड़ी आज भी उनके घर के बाहर खड़ी रहती है जो ऐसे दौर की निशानी है जब नेता ईमानदार हुआ करते थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनके लोन को माफ करने की पेशकश भी की थी लेकिन शास्त्री जी की पत्नी ललिता शास्त्री उनकी बात को सहजता से नकारते हुए कहा कि किस्तें वह ही भरेंगी। शास्त्री जी की मौत के चार साल बाद तक ललिता कार की ईएमआई किस्त बैंक को चुकाती रहीं।
घर की रसोई में मिट्टी का चूल्हा हो और बेडरूम में पटुआ की सुतली से बिनी खाट तो एक बार आंखों पर यकीन नहीं होगा कि यह जगह देश के प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री की है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि अब मंत्री-विधायक तो दूर सत्ताधारी नेताओं के करीबी रिश्तेदार और कारिंदे भी मौका पाकर चंद दिनों में ही ऊंची हवेलियों के मालिक और कंगाल से करोड़पति बन बैठते हैं। पांच साल तक प्रधानमंत्री रहे शास्त्री जी का घर आज भी पुराना वाराणसी के रामनगर में उस दौर की स्वच्छ और ईमानदार राजनीति की गवाही देता है। उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने देश उनके मिट्टी के घर को म्यूजियम के रूप में तब्दील कर दिया है। सितंबर 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल राम नाइक ने इसका उद्घाटन किया था।
जब शास्त्री जी प्रधानमंत्री बने तब उनके पड़ोस के राजनारायण लाल मुलाकात के लिए आए। बोले- शास्त्री जी! अब तो अपना मकान बनवा लीजिए। उन्होंने जो जवाब दिया उसे सुनकर वो सहम गए। शास्त्री जी का कहना था कि मेरा तो अभी बहुत अच्छा है। मेरे देश की बहुतायत जनता के पास तो झोपड़ियां ही हैं। चिंता है कि पहले उनके मकान बन जाएं फिर अपने मकान के बारे में सोचूंगा।
लाल बहादुर शास्त्री जी के कई किस्से हैं, एक बार जब उन्हें पता चला कि उनके बेटे को उनके नाम पर पदोन्नति मिल रही है तो उन्होंने स्वयं इसको रुकवा दिया। बेटे के ‘सेंट स्टीफेंस कॉलेज’ के प्रवेश फॉर्म में उन्होंने अपने काम के बारे में लिखा कि वो एक ‘सरकारी नौकर’ हैं। प्रधानमंत्री रहते हुए उनके बेटे को नौकरी पाने के लिए एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज के दफ्तर के बाहर, अन्य लोगों की तरह कतार में लगना पड़ा। जब क्लर्क ने उनके बेटे से पूछा कि उनके पिता क्या करते हैं तो उन्होंने जवाब दिया, “प्रधानमंत्री हैं देश के”।
लाल बहादुर शास्त्री जी मज़बूत इरादों वाले इंसान थे। जब पाकिस्तानी घुसपैठिए कश्मीर के लिए रवाना हुए तो उन्होंने लाल किले पर अपने भाषण में कहा, “हम ईंट का जवाब पत्थर से देंगे”। पाकिस्तान के जनरल अय्यूब ने उनके छोटे कद का मज़ाक बनाकर कहा, “यह छोटा क्या करेगा?” पूरे विश्व ने फिर एक ऐसा युद्ध देखा जो सदियों तक भुलाया नहीं जा सकता है।
शास्त्री जी जैसे नेता अब दुबारा नहीं हो सकते, अगर हुए भी तो यह चमत्कार से कम नहीं होगा।
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