
Bharat varta desk:
भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने रविवार को उत्तम तोता दिवस पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए संसद के कामकाज की आलोचना की, जिसमें समस्याओं पर ध्यान न देकर कानून पर उचित ढंग से बहस नहीं की जाती है । उच्चतम न्यायलय में आयोजित एक कार्यक्रम में चीफ जस्टिस ने कहा कि “अगर हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों को देखें, तो उनमें से कई कानूनी बिरादरी से भी थे। लोकसभा और राज्यसभा के पहले सदस्य वकीलों के समुदाय से भरे हुए थे। उन्होंने कहा कि सदन में वकीलों का होना बहुत जरूरी है। अभी वहां कानून को लेकर बहुत स्पष्टता नहीं है। यह जनता के लिए बहुत ही नुकसान देय है। उन्होंने कहा कि पहले बहस में बहुत रचनात्मकता दिखती थी। लेकिन अभी दुर्भाग्य है, क्या हो रहा है सदन में? मुख्य न्यायाधीश रमना ने कहा कि यह नीतियों और उपलब्धियों की “समीक्षा” करने का समय है । उन्होंने कहा, “75 साल देश के इतिहास में कोई छोटी अवधि नहीं है। जब हम स्कूल जाते थे तब हमें केवल गुड़ का टुकड़ा और एक छोटा झंडा दिया जाता था । भले ही आज हमें इतना कुछ मिल रहा लेकिन हम खुश नहीं हैं । हमारा संतोष करने का स्तर नीचे पहुंच गया है ।
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