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कोई भी भगवान ब्राह्मण नहीं, भगवान शिव एसटी- एससी, जेएनयू की कुलपति का विवादित बयान

Bharat Varta Desk: बिहार के गया स्थित विष्णुपद मंदिर के अंदर गैर-हिंदू सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सह गया के प्रभारी मंत्री मोहम्मद इसराइल मंसूरी के प्रवेश को जहां भारतीय जनता पार्टी ने मुद्दा बनाया है और इसके आधार पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लगातार घेर रही है वहीं दूसरी ओर भाजपा की नजदीक माने जाने वाली जेएनयू की कुलपति ने हिंदू देवी-देवताओं के संबंध में विवादित बयान देकर पूरे देश में बवाल खड़ा कर दिया है। हमेशा हिंदू देवी को अपमानित करने को लेकर विवादों में रहने वाले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की वर्तमान कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी ने कहा है कि मनुस्मृति के अनुसार सभी महिलाएं शूद्र हैं, इसलिए कोई भी महिला यह दावा नहीं कर सकती कि वह ब्राह्मण या कुछ और है उन्होंने कहा कि कोई भी भगवान ब्राह्मण नहीं है। भगवान शिव अनुसूचित जाति या जनजाति से होने चाहिए क्योंकि वे शमशान में बैठते हैं। कुलपति ने कहा कि मनुष्य जाति के विज्ञान के अनुसार देवता उच्च जाति के नहीं हैं।
सोमवार को डॉ. बीआर अंबेडकर व्याख्यान श्रृंखला में डॉ. बी आर अंबेडकर के विचार जेंडर जस्टिस: डिकोडिंग द यूनिफॉर्म सिविल कोड’ में व्याख्यान देते हुए कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी कहा कि ”मनुस्मृति में महिलाओं को शूद्रों का दर्जा दिया गया है।.’

उन्होंने यह भी कहा कि मैं सभी महिलाओं को बता दूं कि ”मनुस्मृति के अनुसार सभी महिलाएं शूद्र हैं, इसलिए कोई भी महिला यह दावा नहीं कर सकती कि वह ब्राह्मण या कुछ और है”। औरतों को जाति अपने पिता या पति से मिलती है।
उन्होंने कहा कि कोई भी भगवान ब्राह्मण नहीं है, सबसे ऊंचा क्षत्रिय है। भगवान शिव अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से होने चाहिए, क्योंकि वे श्मशान में बैठते हैं।‌ उनके साथ सांप रहते हैं. वे बहुत कम कपड़े पहनते हैं। मुझे नहीं लगता कि ब्राह्मण श्मशान में बैठ सकते हैं।
भगवान जगन्नाथ वास्तव में आदिवासी मूल से हैं। तो हम अभी भी इस भेदभाव को क्यों जारी रखे हुए हैं जो बहुत ही अमानवीय है।‌ यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम बाबासाहेब के विचारों पर पुनर्विचार कर रहे हैं। हमारे यहां आधुनिक भारत का कोई नेता नहीं है जो इतना महान विचारक था।

हिंदू धर्म कोई धर्म नहीं

उन्होंने कहा, “हिंदू धर्म एक धर्म नहीं है, यह जीवन का एक तरीका है। और अगर यह जीवन का तरीका है तो हम आलोचना से क्यों डरते हैं”।‌ गौतम बुद्ध हमारे समाज में अंतर्निहित, संरचित भेदभाव पर हमें जगाने वाले पहले लोगों में से एक थे।
कुलपति जेएनयू की छात्रा रही हैं। अपने बैच की टॉपर रही यह इस विश्वविद्यालय की प्रथम महिला कुलपति हैं।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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