पॉलिटिक्स

एनडीए के धुरंधरों ने मिलकर रोकी गुप्तेश्वर पांडेय की राह, पढ़िए NewsNLive की खास रिपोर्ट

पटना। बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को विधानसभा चुनाव में बक्सर सीट से टिकट नहीं मिलना अभी सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है। वे डीजीपी के रूप में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफी नजदीक माने जाते थे। इसी संबंध के आधार पर वह अपने सेवानिवृति के 5 महीने पहले नौकरी छोड़ कर चुनाव लड़ने के लिए जदयू में शामिल हुए मगर जब उम्मीदवारी की बारी आई तो बेटिकट होकर मैदान से बाहर हो गए।

दोनों दलों के धुरंधर एकजुट

राजनीतिक प्रेक्षक बता रहे हैं कि गुप्तेश्वर पांडेय को टिकट नहीं मिला इससे ज्यादा लोगों की दिलचस्पी यह जानने में है कि आखिर कौन सी ऐसी परिस्थितियां बनी जिनके कारण वे बेटिकट हो गए? राजनीतिक प्रेक्षक बता रहे हैं कि मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र के रूप में वे पार्टी में आए जरूर मगर दोनों दलों के कद्दावर नेताओं ने मिलकर उनके चुनाव लड़ने की राह रोक दी। इस संबंध में गुप्तेश्वर पांडेय के समर्थकों का कहना है कि पुलिस अधिकारी रहने के दौरान भी गुप्तेश्वर पांडेय व्यापक जन सरोकार वाले अधिकारी रहे हैं। उनका यह जन सरोकार राजनीति में आने पर उन्हें व्यापक जनाधार वाला नेता के रूप में स्थापित ना कर दे, फिर उनका क्या होगा, इस खतरे को भांपते हुए एनडीए के कई दिग्गजों ने एकजुट होकर उन्हें बेटिकट किया। लोग याद दिला रहे हैं कि जब गुप्तेश्वर पांडेय ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की, तब पत्रकारों के सवाल पर जदयू एक कद्दावर नेता ने कहा कि अभी इनका बायोडाटा लिया जाएग जबकि उस समय तक लोग यह मान बैठे थे कि पूर्व डीजीपी का बक्सर सीट से टिकट कंफर्म है।

गुटबाजी के शिकार तो नहीं

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के परिदृश्य पर नजर रखने वाले रणनीतिकारों का मानना है कि एनडीए के घटक दलों और इसके नेताओं में चल रहे खींचतान के शिकार तो नहीं हुए पूर्व डीजीपी। रणनीतिकारों का दावा है कि चुनाव घोषणा के चंद दिन पूर्व डीजीपी का आनन-फानन में वीआरएस लेकर राजनीतिक दल ज्वाइन करना ज्यादातर नेताओं को अच्छा नहीं लगा था। कहा गया कि उन्होंने इस फैसले में एनडीए के बड़े नेताओं को विश्वास में नहीं लिया जबकि जिस बक्सर विधानसभा सीट से वे लड़ना चाहते थे। वहां से भाजपा का उम्मीदवार चुनाव लड़ता रहा है राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार जदयू ने बक्सर सीट को गुप्तेश्वर पांडेय के लिए भाजपा से पुरजोर ढंग से नहीं मांगा। अंदर खाने की जानकारी के मुताबिक जदयू के दिल्ली वाले दोनों प्रमुख नेताओं ने इनके लिए दिलचस्पी नहीं दिखाई। जानकारों का यह भी दावा है अंत में गुपेश्वर पांडेय जदयू के सहयोगी दल की ओर भी मुखातिब हुए लेकिन वहां कई प्रमुख नेता पहले से ही खार खाए बैठे थे। क्योंकि उनका मानना था कि बक्सर सीट से डीजीपी ने चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया लेकिन इसके लिए उन्होंने उन लोगों से पहले बात नहीं की। बक्सर से जुड़े इस पार्टी के दिल्ली वाले एक महत्वपूर्ण नेता भी गुप्तेश्वर के बक्सर सीट से चुनाव लड़ने के खिलाफ थे। जानकारों की माने तो 2014 के लोकसभा चुनाव में नौकरी से रिजाइन देकर बक्सर से चुनाव लड़ने की गुप्तेश्वर पांडे की योजना एनडीए के कद्दावर नेता के कारण ही परवान नहीं चढ़ पाई थी। नेताजी उस समय बिहार सरकार में मंत्री थे।

तेज रेस, सुरमा चिंता में

अंदर खाने सी आई जानकारी के मुताबिक वाल्मिकीनगर लोकसभा सीट से उप चुनाव लड़ने की संभावना को भी दोनों दलों के धुरंधरों ने मिलकर खारिज किया। तटस्थ प्रेक्षकों का का कहना है कि डीजी रैंक के एक पूर्व अधिकारी आसानी से टिकट लेकर मैदान में हैं लेकिन गुप्तेश्वर पांडेय नहीं पच पाए क्योंकि सब यह बात समझ रहे हैं कि तेज रेस का घोड़ा भविष्य में राजनीतिक सुरमाओं के लिए के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।

पूर्व जवान पर भरोसा, डीजीपी पर नहीं

यही वजह है कि नेताओं ने बक्सर सीट पर एक पूर्व पुलिस जवान पर भरोसा किया लेकिन पूर्व डीजीपी पर नहीं। लेकिन एनडीए के नेता ऐसे विचारों को खारिज करते हैं, एक प्रमुख नेता ने कहा कि यह सब पांडेय जी को चाहने वालों की भावना हो सकती है जिसका हकीकत से कोई लेना देना नहीं।

Dr Rishikesh

Editor - Bharat Varta (National Monthly Magazine & Web Media Network)

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