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आनंद मोहन की रिहाई पर सियासी बवाल

Bharat varta desk,:

आईएएस अफसर जी कृष्णैया की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद आनंद मोहन का पैरोल आज पूरा हो गया। दोपहर बाद वे सहरसा जेल में सरेंडर करेंगे। उसके बाद स्थाई रूप से उनकी रिहाई की प्रक्रिया शुरू होगी।
उधर उनकी रिहाई की नीतीश सरकार के फैसले पर सियासी बवाल हो गया है। सबसे पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने आनंद मोहन की रिहाई के नीतीश सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज उठाई थी। अब पक्ष- विपक्ष के कई नेता सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हैं तो कोई समर्थन कर रहा है। सरकार के दल में शामिल माले ने रिहाई का विरोध किया है तो रिहाई का विरोध कर रही भाजपा के ही एक सांसद ने अपनी पार्टी से अलग हटकर आनंद मोहन का समर्थन किया है।

आईएएस एसोसिएशन का विरोध

सेंट्रल आईएएस एसोसिएशन नीतीश सरकार के इस फैसले की कड़ी निंदा करते हुए इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। एसोसिएशन की ओर से कहा गया है कि बिहार सरकार का यह फैसला काफी निराश करने वाला है क्योंकि आनंद मोहन ने आईएएस अफसर कृष्णैया की नृशंस हत्या की थी। एसोसिएशन ने नीतीश सरकार के इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। एसोसिएशन ने दिवंगत आईएस की पत्नी उमा देवी से संपर्क साधा है जिन्होंने रिहाई को गलत बताया है। उमा के जरिए आईएएस एसोसिएशन नीतीश सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में है।

आनंद मोहन के जरिए 26 कैदियों को रिहा करने पर भाजपा को ऐतराज

पूर्व सांसद आनंद मोहन के साथ अन्य 26 कैदी भी रिहा हो रहे हैं। भाजपा ने इस मुद्दे पर नीतीश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और बेतिया से बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने कहा है कि आनंद मोहन की आड़ में 26 दुर्दांत अपराधियों को बूथ लूटने के लिए रिहा कराया जा रहा है. इससे बिहार में अपराध की घटनाओं में बढ़ोतरी होगी।

लेकिन भाजपा सांसद रिहाई के पक्ष में

लेकिन भाजपा के ही एक सांसद राजीव प्रताप रूडी ने आनंद मोहन की रिहाई का समर्थन किया है। उन्होंने कहा इस घटना में आनंद मोहन निर्दोष हैं। यही नहीं उन्होंने हत्या मामले में जेल में बंद पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह की रिहाई की भी वकालत की है। रूडी ने कहा कि सब कोई जानता है कि प्रभुनाथ सिंह को भी साजिश के तहत फंसाया गया है।

सरकार में शामिल माले ने किया विरोध
नीतीश सरकार में शामिल माले ने आनंद मोहन की रिहाई का विरोध किया है। भाकपा माले ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि बिहार सरकार ने 14 वर्ष से अधिक की सजा काट चुके 27 बंदियों की रिहाई का आदेश दिया तो बहुचर्चित भदासी कांड के टाडाबंदियों की रिहाई पर चुप क्यों हैं? पार्टी का कहना है कि ये शेष बचे सभी 6 टाडा बंदी दलित-अतिपिछड़े व पिछड़े समुदाय के हैं और इन्होंने कुल मिलाकर 22 साल की सजा काट ली है. भाकपा माले का कहना है कि परिहार के साल भी जोड़ लिए जाएं तो यह अवधि 30 साल से अधिक हो जाती है. सब के सब बूढ़े हो चुके हैं और गंभीर रूप से बीमार हैं।

तेजस्वी ने किया बचाव
जबकि उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा है कि रिहाई नियम सम्मत है। आनंद मोहन सजा काटने के बाद कानूनी प्रावधानों के तहत रिहा हो रहे हैं। इसके विरोध का कोई मतलब नहीं है। उधर आनंद मोहन ने भी अपनी रिहाई को कानूनी प्रक्रिया के तहत बताया है। उन्होंने कहा है कि पहले भी ऐसे कई उदाहरण है जिसमें 14 साल सजा काटने के बाद आजीवन कारावास याफ़्ता की रिहाई हुई है।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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