
कार्यक्रम के प्रारंभ में लोक गायिका डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति की
पटना। जगदंबी प्रसाद यादव स्मृति संस्थान, अंतरराष्ट्रीय हिंदी परिषद् तथा अखिल भारतीय नागरी लिपि परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में राजभाषा, नागरी लिपि एवं भारतीय संस्कृति पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं काव्य गोष्ठी में संस्कार भारती के राष्ट्रीय महामंत्री अमीर चंद ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि भारत और भारतीयता के साथ-साथ भारतीय जनमानस को मजबूती प्रदान करने में हिंदी का परम योगदान है । मातृभाषा से हमें वही ताकत मिलती है जो मां के दूध से प्राप्त होती है। कार्यक्रम में बिहार सरकार के सहकारिता एवं गन्ना विकास मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि जगदंबी बाबू ने हिंदी भाषा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंतरराष्ट्रीय हिंदी परिषद् के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में हिंदी विश्व स्तर पर परचम लहराने की स्थिति में आ चुकी है। हिंदी का विकास सिर्फ सरकारी माध्यमों से नहीं हो रहा बल्कि मीडिया और संवाद के दूसरे माध्यम से भी हिंदी को मजबूती मिल रही है। हम हिन्दी की बात करते हैं पर हिन्दी में नहीं करते, हम संकल्प हिन्दी की लेते हैं पर विकल्प अंग्रेजी में ढूंढते हैं। आज हिन्दी को प्यार ही नहीं व्यवहार की आवश्यकता है। आज हिन्दी को ज्ञान की भाषा, विज्ञान की भाषा, शासन की, प्रशासन की, न्याय और न्यायालय की भाषा बनाने की आवश्यकता है। जगदंबी प्रसाद यादव स्मृति प्रतिष्ठान तथा अंतरराष्ट्रीय हिंदी परिषद् की महासचिव डॉ अंशुमाला ने संस्था की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती प्रदान करने तथा गैर-हिंदी प्रदेशों में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए संस्था लगातार काम कर रही है। अखिल भारतीय नागरी लिपि परिषद के महामंत्री डॉ हरि सिंह पॉल ने कहा कि देवनागरी लिपि भारतीय भाषाओं के लिए सबसे उपयुक्त है। इस लिपि में वैज्ञानिकता है। केंद्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष अनिल शर्मा जोशी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में भाषा और संस्कृति को केंद्र में रखा गया है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा की पढ़ाई भारतीय भाषाओं के माध्यम से करने पर सहमति बन गई है। अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् और विदेश मंत्रालय की पत्रिका गगनांचल के संपादक डॉ आशीष कंधवे ने कहा कि हिंदी को अभिमन्यु बनाकर चक्रव्यूह में घेरने की कोशिश बार-बार की जाती रही है। लेकिन यदि हिंदी प्रदेश के लोग हिंदी के साथ खड़े हों तो फिर हिंदी के रथ का पहिया कोई रोक नहीं सकता। अखिल भारतीय नागरी लिपि परिषद् के संरक्षक डॉ परमानंद पांचाल ने कहा कि भारतीय भाषाओं की लिपि भी भारतीय ही होनी चाहिए। हिंदी, मराठी, नेपाली, डोगरी, मैथिली, कोंकणी आदि भाषाओं की लिपि देवनागरी है। जनजातीय समुदाय द्वारा उपयोग में लाई जा रही आदिभाषाओं के साहित्य को देवनागरी लिपि में लिपिबद्ध किया जाना चाहिए। त्रिपुरा के विधायक और भाषाविद् अतुल देवबर्मन ने भी कहा कि त्रिपुरा की पारंपरिक भाषाओं के लिए देवनागरी लिपि को ही सबसे उपयुक्त पाया गया।
गोष्ठी में आकाशवाणी के सहायक निदेशक डॉ ओमप्रकाश जमुआर, हिंदी भवन के निदेशक डॉ जवाहर कर्णावट, विज्ञान विषयों की लेखिका डॉ शुभ्रता मिश्रा और भारतीय रेल अधिकारी एवं साहित्यकार दिलीप कुमार ने भी अपने विचार रखे। इससे पहले कार्यक्रम के प्रारंभ में लोक गायिका डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति की। कार्यक्रम में गोवा की पूर्व राज्यपाल और साहित्यकार डॉ मृदुला सिन्हा को श्रद्धांजलि दी गई और उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। दूसरे सत्र में पद्मश्री डॉ शांति जैन की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें डॉ आरती कुमारी, सारिका भूषण, प्रो नीलू गुप्ता (अमेरिका), डॉ स्नेह ठाकुर(कनाडा), डॉ मीनाक्षी हिमांशु, अनिरुद्ध सिन्हा, शोभा रानी वर्णवाल, मीनू मीना सिन्हा आदि ने कविताओं का पाठ किया।
Bharat varta Desk सिवान जिले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के बीच एक… Read More
Bharat varta Desk आईएएस संजीव खिरवार (IAS Sanjeev Khirwar) को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) का… Read More
Bharat varta Desk नितिन नबीन को आज आधिकारिक रूप से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन… Read More
Bharat varta Desk कर्नाटक के डीजीपी और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रामचंद्र राव को सस्पेंड कर… Read More
Bharat varta Desk प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज पश्चिम बंगाल के मालदा रेलवे स्टेशन से… Read More
Bharat varta Desk भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की तारीख… Read More